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कभी-कभी जिंदगी हमें ऐसे मोड़ पर लाकर खड़ा कर देती है जहाँ हमारा मूड और हमारा काम आमने-सामने खड़े हो जाते हैं। एक तरफ थकान, निराशा, बहाने और मन का आलस… और दूसरी तरफ जिम्मेदारी, सपने, लक्ष्य और परिवार की उम्मीदें।
उस दिन फैसला हमें करना होता है —
क्या हम मूड के साथ जाएंगे या अपने मिशन के साथ?

मैं, धनंजय राजेश गावड़े, एक प्रेस फोटोग्राफर के रूप में कई बार ऐसे क्षणों से गुज़रा हूँ। कभी तेज धूप में, कभी बारिश में, कभी रात के अंधेरे में… कैमरा हाथ में होता है लेकिन मन थका हुआ होता है। कई बार हालात ऐसे होते हैं कि दिल कहता है — “आज नहीं…”
लेकिन उसी पल दिमाग और जिम्मेदारी कहती है — “आज ही… क्योंकि यही दिन तुम्हें आगे बढ़ाएगा।”
दोस्तों,
सफलता उन लोगों के पास नहीं जाती जिनका मूड अच्छा होता है,
सफलता उन लोगों के पास जाती है जिनका इरादा मजबूत होता है।
जब आपका काम आपके मूड से ज्यादा जरूरी हो जाता है, तब आप सामान्य इंसान से असाधारण बन जाते हैं। क्योंकि मूड हर दिन बदलता है, लेकिन लक्ष्य स्थिर रहता है।
सोचिए, अगर सूरज भी यह सोचकर उगना बंद कर दे कि “आज मेरा मूड नहीं है”… तो क्या दुनिया रोशन हो पाएगी?
नहीं।
सूरज रोज निकलता है — चाहे बादल हों या तूफान।
उसी तरह हमें भी रोज अपने कर्तव्य की ओर बढ़ना है — चाहे मन कैसा भी हो।
मैंने अपने कैमरे से हजारों चेहरे देखे हैं —
कुछ संघर्ष करते हुए,
कुछ हार मानते हुए,
और कुछ हालात से लड़ते हुए।

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आज अगर आपका मन काम करने का नहीं कर रहा…
आज अगर हालात आपके खिलाफ हैं…
आज अगर आपको लगता है कि कोई आपका साथ नहीं दे रहा…
तो याद रखिए —
यही वो दिन है जो आपको मजबूत बनाएगा।
यही वो पल है जो आपके चरित्र की असली पहचान तय करेगा।
काम को प्राथमिकता देना केवल प्रोफेशनलिज़्म नहीं है,
यह आत्मसम्मान है…
यह अपने सपनों के प्रति वफादारी है…
यह अपने परिवार और समाज के प्रति जिम्मेदारी है।
जब आप अपने मूड को किनारे रखकर अपने कर्तव्य को निभाते हैं, तब दुनिया आपको रोक नहीं सकती। क्योंकि उस दिन आप भावनाओं से नहीं, उद्देश्य से चल रहे होते हैं।

सफलता का असली राज यही है —
अनुशासन मूड से बड़ा होता है।
जिम्मेदारी आराम से बड़ी होती है।
और लक्ष्य हर बहाने से बड़ा होता है।
मेरे प्यारे दर्शकों,
आप चाहे किसी भी क्षेत्र में हों — विद्यार्थी, कर्मचारी, कलाकार, पत्रकार या व्यवसायी —
अगर आपने अपने काम को अपने मूड से ऊपर रख लिया, तो विश्वास मानिए…
आपको सफल होने से कोई नहीं रोक सकता।
आज एक संकल्प लीजिए —
“मैं अपने मूड का गुलाम नहीं, अपने लक्ष्य का सिपाही बनूंगा।”
यही सोच आपको भीड़ से अलग बनाएगी।
यही सोच आपको इतिहास में दर्ज करेगी।
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📸 प्रस्तुति:
धनंजय राजेश गावड़े
(Press Photographer)
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✨ अंत में बस इतना ही —
जिस दिन आपका काम आपके मूड से बड़ा हो जाएगा,
उस दिन आपकी सफलता आपकी पहचान बन जाएगी।
जय हिंद। 🇮🇳


