
🌊 समुद्र कभी मीठा नहीं होता…
समुद्र में चाहे आप कितनी भी शक्कर डाल दें, वह कभी मीठा नहीं होता।
ठीक उसी प्रकार इस संसार में कुछ ऐसे मतलबी और स्वार्थी लोग होते हैं, जिनके जीवन में आप चाहे जितनी अच्छाई, प्रेम, सहयोग और सम्मान भर दें — वे कभी आपकी कदर नहीं करेंगे।
यह प्रकृति का नियम है —
जिसका स्वभाव खारा है, वह खारा ही रहेगा।
🌟 जीवन की सच्चाई

दोस्तों,
जीवन में हम कई बार यह गलती कर बैठते हैं कि हम अपनी अच्छाई से हर दिल जीत सकते हैं। हम सोचते हैं कि यदि हम किसी के लिए निस्वार्थ भाव से खड़े रहें, उसकी मदद करें, उसका सम्मान करें — तो वह भी हमारे प्रति वैसा ही व्यवहार करेगा।
लेकिन सच्चाई यह है कि हर व्यक्ति का चरित्र और सोच अलग होती है।
कुछ लोग आपकी अच्छाई को आपकी कमजोरी समझ लेते हैं।
कुछ लोग आपके त्याग को आपका कर्तव्य मान लेते हैं।
और कुछ लोग आपकी खामोशी को आपकी मजबूरी समझ बैठते हैं।
🔥 आत्मसम्मान सबसे बड़ा धन

याद रखिए —
दूसरों को खुश करने की कोशिश में यदि आपका आत्मसम्मान आहत हो रहा है, तो वह संबंध आपके लिए सही नहीं है।
आपका समय, आपकी ऊर्जा और आपकी भावनाएँ अनमोल हैं।
उन्हें उन लोगों पर खर्च कीजिए जो आपकी कद्र करते हैं, जो आपके साथ खड़े रहते हैं, जो आपके संघर्ष को समझते हैं।
समुद्र को मीठा बनाने की कोशिश में अपनी सारी शक्कर व्यर्थ मत कीजिए।
अपनी मिठास उन रिश्तों में बाँटिए जहाँ उसकी कीमत हो।
💪 दूरी बनाना कमजोरी नहीं, समझदारी है

कभी-कभी जीवन में दूरी बनाना ही सबसे बड़ा साहस होता है।
हर लड़ाई जीतना जरूरी नहीं,
कुछ रिश्तों से दूर हो जाना ही असली जीत होती है।
जो लोग आपकी कदर नहीं करते,
उनसे दूरी बनाना स्वार्थ नहीं —
यह आत्मसम्मान की रक्षा है।
🌅 अंतिम संदेश

मेरे प्रिय साथियों,
अपने जीवन को सकारात्मक लोगों से भरिए।
उन लोगों के साथ चलिए जो आपके सपनों को उड़ान दें,
न कि आपकी भावनाओं को ठेस पहुँचाएँ।
याद रखिए —
आप समुद्र नहीं हैं कि हर बार खारेपन को स्वीकार करें।
आप वह शक्कर हैं जो जहाँ घुलती है, वहाँ मिठास फैला देती है।
अपनी कीमत पहचानिए,
अपने आत्मसम्मान को सर्वोपरि रखिए,
और आगे बढ़ते रहिए।
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📰 जन कल्याण टाइम न्यूज, मुंबई

Editor in Chief: राजेश लक्ष्मण गावडे

📸 विशेष प्रस्तुति: धनंजय राजेश गावडे (Press Photographer)
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✨ “जहाँ सम्मान न मिले, वहाँ से सम्मानपूर्वक दूर हो जाना ही बुद्धिमानी है।” ✨

