
बहुत समय पहले की बात है…
एक छोटे से शहर में आदित्य नाम का एक युवक रहता था। मेहनती था, सपने बड़े थे और दिल में कुछ कर दिखाने की आग थी। शुरुआत में उसकी ज़िंदगी बड़ी सधी हुई चल रही थी —
सेहत भी ठीक,
चेहरे पर चमक,
कारोबार धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था,
दोस्तों का साथ था
और रिश्तों में अपनापन।
लेकिन फिर… ज़िंदगी की भागदौड़ शुरू हुई।
ध्यान का बँटना ही पतन की शुरुआत थी
आदित्य ने सोचा —
“अब तो सब सेट है, थोड़ी ढील दे देता हूँ।”
व्यायाम छोड़ दिया → “कल से करेंगे”
सेहत को नज़रअंदाज़ किया → “अभी टाइम नहीं है”
रिश्तों को वक्त देना बंद किया → “वे समझ जाएंगे”
कारोबार में खुद ध्यान देना छोड़ा → “स्टाफ संभाल लेगा”
दोस्तों से मिलना कम किया → “फिर कभी”
उसे यह एहसास ही नहीं हुआ कि
जिस पर ध्यान देना बंद किया जाता है, वह धीरे-धीरे दम तोड़ने लगता है।
सेहत का अंत – बिना शोर के

कुछ सालों बाद…
वही आदित्य जल्दी थकने लगा।
चेहरे की रंगत उड़ गई।
डॉक्टर ने कहा –
“बीमारी अचानक नहीं आई, आपने वर्षों से अपने शरीर को नज़रअंदाज़ किया है।”
सेहत ने कोई चेतावनी नहीं दी थी,
बस चुपचाप जवाब देना बंद कर दिया।
कारोबार का पतन – बिना आवाज़ के
कारोबार जो कभी उसकी पहचान था,
अब घाटे में जा रहा था।
ग्राहक कम हो गए,
कर्मचारी मनमानी करने लगे,
प्रतिस्पर्धी आगे निकल गए।
क्यों?
क्योंकि मालिक का ध्यान हट चुका था।
कारोबार वही चलता है, जहाँ मालिक की नज़र रहती है।
रिश्तों की दूरी – बिना लड़ाई के
सबसे ज़्यादा दर्द तब हुआ
जब एक दिन उसे एहसास हुआ —
अब फोन करने वाला कोई नहीं रहा,
दोस्त दूर हो गए,
रिश्तों में औपचारिकता आ गई।
न कोई झगड़ा हुआ,
न कोई बड़ा विवाद…
बस ध्यान और समय की कमी ने रिश्तों को खत्म कर दिया।
बोध का क्षण

एक दिन एक बुज़ुर्ग ने आदित्य से कहा:
“बेटा, आग को फूँक मिलती रहे तो जलती है,
छोड़ दो तो बुझ जाती है।
चाहे वह शरीर हो, पैसा हो, व्यापार हो या रिश्ता।”
यहीं से आदित्य की आँखें खुलीं।
पुनः शुरुआत
उसने तय किया —
रोज़ अपने शरीर को समय देगा
कारोबार में खुद शामिल रहेगा
रिश्तों को फिर से सींचेगा
दोस्तों से बात करेगा
छोटी-छोटी चीज़ों पर ध्यान देगा
धीरे-धीरे — सेहत लौटी,
चेहरे पर चमक आई,
कारोबार संभला,
रिश्तों में गर्माहट वापस आई।
कहानी का सबसे बड़ा संदेश
🔥 जिस पर आप ध्यान देना छोड़ देंगे,
उसका अंत तय है।
🌱 और जिस पर आप रोज़ थोड़ा-सा ध्यान देंगे,
वही आपकी ज़िंदगी की सबसे बड़ी ताकत बनेगा।
सेहत → रोज़ देखभाल माँगती है
पैसा → समझदारी और अनुशासन चाहता है
कारोबार → मालिक की मौजूदगी चाहता है
दोस्ती और रिश्ते → समय, सम्मान और संवाद चाहते हैं
अंतिम पंक्तियाँ (जन-जन के नाम संदेश)
आज ज़रा रुकिए…
और खुद से पूछिए —
❓ मैं किस चीज़ को नज़रअंदाज़ कर रहा हूँ?
❓ किस रिश्ते को समय नहीं दे पा रहा हूँ?
❓ किस सपने पर ध्यान देना छोड़ चुका हूँ?
याद रखिए —
अंत अचानक नहीं होता,
ध्यान छोड़ने से होता है।

✍️ राजेश लक्ष्मण गावडे
Editor-in-Chief – Jan Kalyan Time News, Mumbai
जन-जन तक पहुँचे यही उद्देश्य… यही संकल्प।
