
- लालफीताशाही की भेंट चढ़ी श्रद्धा वाल्कर की फाइल
मुंबई: एक बुजुर्ग पिता (Father) अपनी 28 साल की बेटी के शव के अवशेष के लिए पिछले एक वर्ष में 25 बार मुंबई से दिल्ली के चक्कर लगा चुका है। लेकिन उन्हें बेटी के अंतिम संस्कार के लिए अवशेष (Body Remains) नहीं मिल रहा है। देश के सबसे भयावह श्रद्धा वाल्कर हत्याकांड (Shraddha Walker Murder case) को एक साल बीत चुका है और पिता बेटी को इंसाफ (Justice) दिलाने के लिए सरकारी चौखट पर माथा टेक रहे हैं। लेकिन शायद श्रद्धा केस की फाइल लालफीताशाही की भेंट चढ़ गई है।
अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल
श्रद्धा के पिता विकास वाल्कर ने चेतावनी दी कि अगर मुझे मेरी बेटी के अवशेष नहीं दिया गया तो मैं दिल्ली में अनिश्चितकालीन भूख हड़ताल करूंगा। उन्होंने न्याय प्रणाली पर भी सवाल उठाते हुए कहा है कि फास्ट ट्रैक कोर्ट में केस चलने के बाद भी अभी तक मेरी बेटी को इंसाफ नहीं मिला है।
लापरवाही करने वालों पर नहीं हुई कार्रवाई
विकास वाल्कर ने राज्य के गृह मंत्री देवेंद्र फडणवीस से पूछा है कि जिन पुलिस अधिकारियों की लापरवाही से मेरी बेटी आज इस दुनिया में नहीं है। उन अधिकारियों की जांच के लिए नियुक्त की गई स्पेशल इन्वेस्टिगेशन टीम ने उन पर अब तक कोई कार्रवाई क्यों नहीं की है। बता दें कि, 28 वर्षीय श्रद्धा वाल्कर की हत्या का खुलासा नवंबर 2022 में हुआ था। जिसकी हत्या उसके बॉयफ्रेंड आफताब पूनावाला ने दिल्ली में की थी।
मई 2022 में आफताब ने उसकी हत्या कर दी
आफताब ने पुलिस से बचने के लिए श्रद्धा के 36 टुकड़े कर उसको विभिन्न राज्यों में फेंक दिया था। हालांकि पुलिस को तीन राज्यों से श्रद्धा के सिर्फ 13 वशेष ही मिले थे। देशभर को झकझोर कर रख देने वाले श्रद्धा वाल्कर मर्डर केस को एक साल हो गया है। गौरतलब है कि, वसई में रहने वाली श्रद्धा वाल्कर अपने बॉयफ्रेंड आफताब पूनावाला के साथ दिल्ली में लिव-इन रिलेशनशिप रह रही थी। मई 2022 में आफताब ने उसकी हत्या कर दी थी। इसके बाद शव को ठिकाने लगाने के लिए कुछ टुकड़ों को गुड़गांव के जंगल में फेंक दिया था। 14 नवंबर को मामला सामने आने के बाद हड़कंप मच गया था। दिल्ली पुलिस ने आफताब द्वारा जंगल में फेंके गए श्रद्धा के शवों के 13 अवशेष बरामद किया है। श्रद्धा वाल्कर की हत्या कर उसके टुकड़े आफताब ने घर की फ्रिज में जुन, जुलाई, अगस्त, सितंबर, अक्टूबर यहां तक की आधा नवंबर माह तक रखा था। आफताब शव के टुकड़ों के साथ उसी घर में रहता और खाना बनाकर खाता था। किसी को पता नहीं चले रोज़ उसके टुकड़े जंगलों में फेकने जाता था।