
मनी लॉन्ड्रिंग पर शिकंजा कसने की तैयारी में ईडी
नई दिल्ली। केंद्र सरकार द्वारा रियल-मनी ऑनलाइन गेमिंग पर लगाए गए हालिया प्रतिबंध के बाद प्रवर्तन निदेशालय (ED) अब इस क्षेत्र से जुड़ी मनी लॉन्ड्रिंग की गतिविधियों पर सख्ती से नजर रखेगा। एजेंसी ने स्पष्ट किया है कि ऐसे मामलों में न केवल जांच तेज की जाएगी बल्कि आरोपपत्र समय पर दाखिल कर ट्रायल को भी फास्ट ट्रैक किया जाएगा। यह निर्णय जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में 12 और 13 सितंबर को हुई ईडी की 32वीं त्रैमासिक कॉन्फ्रेंस में लिया गया। बैठक की अध्यक्षता ईडी निदेशक राहुल नवीन ने की। इस दौरान एजेंसी के सभी जोनल ऑफिसरों और वरिष्ठ अधिकारियों ने शिरकत की। सम्मेलन का आयोजन हाल ही में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद राज्य के सुरक्षा माहौल पर भरोसा बहाल करने के मकसद से किया गया।
ऑनलाइन गेमिंग को लेकर फोकस्ड स्ट्रेटजी
बैठक में खास तौर पर ऑनलाइन गेमिंग और सट्टेबाजी के क्षेत्र को मनी लॉन्ड्रिंग के नए खतरे के रूप में चिह्नित किया गया। सरकार द्वारा इस क्षेत्र में बैन के बाद ईडी ने कहा कि संगठित अपराधियों द्वारा धन शोधन के लिए इसका दुरुपयोग रोकने के लिए “फोकस्ड स्ट्रेटजी” बनाई जाएगी। इसके लिए डिजिटल फ्रॉड से जुड़े मजबूत मामलों को एकीकृत करने और जांच पद्धतियों को व्यवस्थित ढंग से संकलित करने का निर्णय लिया गया।
पीएमएलए मामलों में तेजी और विशेष अदालत की मांग
ईडी ने इस बात पर जोर दिया कि रोकथाम और सतर्कता उसकी प्राथमिकता है। एजेंसी ने उच्च न्यायालयों के मुख्य न्यायाधीशों को पत्र भेजकर विशेष PMLA अदालतें गठित करने का प्रस्ताव दिया है ताकि मामलों की सुनवाई तेज हो सके। अभी तक ईडी की पीएमएलए मामलों में 94 प्रतिशत से अधिक की सजा दर है, जिसमें 53 में से 50 मामलों में सजा मिली है।
संपत्ति जब्ती और पीड़ितों को राहत
बैठक में यह भी तय हुआ कि संशोधित नियम लाकर जब्त संपत्तियों पर जल्द कब्जा सुनिश्चित किया जाएगा ताकि अपराधियों को उनके काले धन का लाभ न मिल सके। ईडी ने अब तक 34,000 करोड़ रुपये से अधिक की संपत्ति पीड़ितों और वैध दावेदारों को लौटाई है। यह कदम हाल के वर्षों में और सक्रियता से उठाया जा रहा है।
विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम पर भी चर्चा
सम्मेलन में विदेशी मुद्रा प्रबंधन अधिनियम और दिवाला एवं शोधन अक्षमता संहिता से जुड़े मामलों की समीक्षा भी हुई। यह पाया गया कि कुछ मामलों में आईबीसी प्रावधानों का गलत इस्तेमाल हो रहा है। अधिकारियों को निर्देश दिया गया कि ऐसे मामलों की पहचान कर सख्त कार्रवाई की जाए। वहीं, लंबित एफईआरए मामलों को जल्द निपटाने के निर्देश भी दिए गए।