इंसान क्या क्या नहीं कर गुजरता जीवन में अपने सपने पूरे करने के लिए. कुछ खुशनसीब होते हैं जो अपने सपनों को साकार होता देखते हैं और ऐसे ही लोग उदाहरण बन जाते हैं. मगर लाखों लोग ऐसे भी रह जाते हैं जिन्हें लगता है कि दुर्भाग्य की वजह से वो अपने सपनों को पूरा करने में सफल नहीं हो पाए अपने उद्देश्य प्राप्त नहीं कर सके.
बहुत बार परिस्थितियां हमारे बस में नहीं होती ऐसे में असफल हो जाना कोई बहुत बुरी बात नहीं है लेकिन लक्ष्य प्राप्त न कर पाने के पीछे सबसे बुरा भाग्य तब होता है जब आप स्वयं ही आलसी होते हैं और दोष भाग्य पर मढ़ देते हैं. सबसे बुरा भाग्य होता है जब आप एक बार गिरकर गिरे रहते हैं एक बार असफल होकर हार मान कर बैठ जाते हैं साहस गँवा कर. जब आप ‘चरैवेती चरैवेती’ अर्थात चलते रहो चलते रहो मंत्र भूल कर दुर्भाग्य का रोना रोते सिर पकड़कर बैठ जाते हैं. सुख दुख, हार जीत और सफलता असफलता एक ही सिक्के के दो पहलू हैं. सिक्का अगर आपके विपरीत पहलू में आपकी चाहत के विपरीत दिशा में आ गिरा है तो फिर से उठाइए इसे और उछाल दीजिए हवा में, कौन जाने इस बार जीत आपकी प्रतीक्षा कर रही हो.
उछालिए तो सही सिक्का, कीजिए तो सही प्रयास फिर से.
आरएलजी प्रोडक्शन के तहत बने इस वीडियो में स्टैंड अप कॉमेडियन बी आशीष इसी बात को बड़े ही रोचक और अलहदा अंदाज में बता रहे हैं। देखिये वीडियो

