रिलायंस इंडस्ट्रीज लिमिटेड (Reliance Industries Limited), जिसके चेयरमैन मुकेश अंबानी हैं, ने हाल ही में 2.9 बिलियन डॉलर (लगभग 25,000 करोड़ रुपये) का विदेशी लोन हासिल किया है।

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राजेश लक्ष्मण गावड़े

मुख्य संपादक (जन कल्याण टाइम)

यह लोन भारत में किसी कंपनी द्वारा पिछले एक साल में लिया गया सबसे बड़ा ऑफशोर लोन है और 2025 में एशिया में सबसे बड़ा सिंडिकेटेड लोन माना जा रहा है। इस लोन की डील पर 9 मई 2025 को हस्ताक्षर किए गए थे। नीचे इस लोन के पूरे विवरण को विस्तार से हिंदी में प्रस्तुत किया गया है, जिसमें लोन की राशि, उद्देश्य, बैंकों की भागीदारी, संरचना, और अन्य महत्वपूर्ण पहलुओं को शामिल किया गया है।

  1. लोन की राशि और मुद्रा
    कुल राशि: 2.9 बिलियन डॉलर (लगभग 25,000 करोड़ रुपये, विनिमय दर के आधार पर)।
    मुद्रा में विभाजन:
    2.4 बिलियन डॉलर: अमेरिकी डॉलर में।
    67.7 बिलियन जापानी येन: जो लगभग 462 मिलियन डॉलर के बराबर है।
    यह लोन एक ड्यूल-करेंसी लोन (दोहरी मुद्रा वाला लोन) है, जिसमें दो अलग-अलग मुद्राओं में राशि ली गई है। यह रणनीति रिलायंस को ब्याज दरों और मुद्रा जोखिमों को संतुलित करने में मदद करती है।
  2. लोन का उद्देश्य
    रिलायंस इंडस्ट्रीज ने इस लोन को मुख्य रूप से निम्नलिखित उद्देश्यों के लिए लिया है:
    पुराने कर्ज का पुनर्भुगतान: यह लोन 2025 में देय मौजूदा कर्ज को चुकाने के लिए उपयोग किया जाएगा। ब्लूमबर्ग की रिपोर्ट के अनुसार, रिलायंस पर 2025 में 2.9 बिलियन डॉलर का कर्ज ब्याज सहित देय है। इस नए लोन से कंपनी अपनी वित्तीय देनदारियों को समय पर पूरा करने की योजना बना रही है।
    नई परियोजनाओं में निवेश: रिलायंस ने अपनी 2024 की वार्षिक आम बैठक (AGM) में उल्लेख किया था कि कंपनी उन्नत तकनीक, विनिर्माण, और नवीकरणीय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में निवेश को तेज करने की योजना बना रही है। इस लोन का एक हिस्सा इन क्षेत्रों में पूंजीगत व्यय (capital expenditure) के लिए उपयोग किया जा सकता है।
    वित्तीय रणनीति: रिलायंस अपनी मजबूत क्रेडिट रेटिंग (Moody’s से Baa2 और Fitch से BBB, जो भारत की सरकारी रेटिंग से बेहतर है) का लाभ उठाकर वैश्विक बाजारों से सस्ती दरों पर पूंजी जुटा रही है। यह कंपनी की वित्तीय स्थिरता और वैश्विक विश्वसनीयता को दर्शाता है।
  3. लोन की संरचना और बैंकों की भागीदारी
    सिंडिकेटेड लोन: यह एक सिंडिकेटेड लोन है, जिसका मतलब है कि इसे कई बैंकों ने मिलकर प्रदान किया है। कुल 55 अंतरराष्ट्रीय बैंकों ने इस डील में हिस्सा लिया, जो इसे 2025 में एशिया की सबसे बड़ी सिंडिकेटेड बैंकिंग डील बनाता है।
    बैंकों की संख्या: 55 बैंकों का समूह, जिसमें वैश्विक स्तर पर प्रमुख वित्तीय संस्थान शामिल हैं। हालांकि, विशिष्ट बैंकों के नाम सार्वजनिक रूप से उजागर नहीं किए गए हैं।
    समझौते की तारीख: इस लोन डील पर 9 मई 2025 को हस्ताक्षर किए गए।
    चुकौती अवधि: लोन की चुकौती अवधि और ब्याज दरों के बारे में अभी तक स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन ब्लूमबर्ग के अनुसार, यह लोन 2025 में देय कर्ज को चुकाने के लिए संरचित किया गया है।
  4. रिलायंस की क्रेडिट रेटिंग और गारंटी
    क्रेडिट रेटिंग: रिलायंस की मजबूत क्रेडिट रेटिंग इस लोन को हासिल करने में महत्वपूर्ण रही है। कंपनी को Moody’s से Baa2 और Fitch से BBB रेटिंग प्राप्त है, जो भारत की संप्रभु रेटिंग से बेहतर है। यह रिलायंस की वित्तीय स्थिरता और वैश्विक बैंकों के बीच भरोसे को दर्शाता है।
    गारंटी: कुछ सोशल मीडिया पोस्ट में दावा किया गया है कि इस लोन के लिए भारत सरकार को गारंटर बनाया गया है। हालांकि, यह दावा सत्यापित नहीं है और विश्वसनीय स्रोतों (जैसे ब्लूमबर्ग, TV9, IBC24) में इसकी पुष्टि नहीं हुई है। रिलायंस की क्रेडिट रेटिंग इतनी मजबूत है कि लोन के लिए किसी व्यक्तिगत या सरकारी गारंटी की आवश्यकता नहीं है।
  5. लोन का महत्व और प्रभाव
    भारत का सबसे बड़ा ऑफशोर लोन: यह लोन 2023 के बाद भारत में किसी कंपनी द्वारा लिया गया सबसे बड़ा विदेशी कर्ज है। यह भारतीय उद्योगों की वैश्विक वित्तीय बाजारों में बढ़ती विश्वसनीयता को दर्शाता है।
    एशिया में रिकॉर्ड: 55 बैंकों की भागीदारी के साथ, यह 2025 में एशिया का सबसे बड़ा सिंडिकेटेड लोन है, जो रिलायंस की वैश्विक पहुंच और वित्तीय ताकत को रेखांकित करता है।
    आर्थिक प्रभाव: यह लोन रिलायंस को अपनी महत्वाकांक्षी परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में सक्षम बनाएगा, जिससे भारत में रोजगार सृजन, तकनीकी नवाचार, और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र में प्रगति हो सकती है।
    बाजार की प्रतिक्रिया: इस लोन की खबर के बाद रिलायंस के शेयरों में कोई विशेष उतार-चढ़ाव नहीं देखा गया, जो कंपनी की स्थिर बाजार स्थिति को दर्शाता है। रिलायंस का मार्केट कैपिटलाइजेशन 5 मई 2025 को 19,37,294.51 करोड़ रुपये था।
  6. रिलायंस की वित्तीय स्थिति
    पिछला कर्ज: ब्लूमबर्ग के अनुसार, रिलायंस पर 2023 में 8 बिलियन डॉलर से अधिक का कर्ज था। यह नया लोन उस कर्ज के एक हिस्से को पुनर्वित्त (refinance) करने के लिए लिया गया है।
    नेट डेट-फ्री स्थिति: 2020 में, रिलायंस ने 1.69 लाख करोड़ रुपये जुटाकर अपनी शुद्ध ऋण स्थिति को शून्य कर लिया था। हालांकि, नए निवेश और परियोजनाओं के लिए कंपनी ने फिर से कर्ज लिया है, जो एक सामान्य कॉर्पोरेट रणनीति है।
    प्रॉफिट और राजस्व: 2025 में रिलायंस का नेट प्रॉफिट 69,648 करोड़ रुपये रहा, और कंपनी का राजस्व 2022 में 7 लाख करोड़ रुपये से अधिक था। यह वित्तीय ताकत रिलायंस को बड़े पैमाने पर कर्ज लेने और चुकाने में सक्षम बनाती है।
  7. रिलायंस के व्यवसाय और भविष्य की योजनाएं
    रिलायंस इंडस्ट्रीज भारत की सबसे बड़ी सार्वजनिक कंपनी है, जो निम्नलिखित क्षेत्रों में काम करती है:
    ऊर्जा और पेट्रोकेमिकल: जामनगर में दुनिया की सबसे बड़ी रिफाइनरी।
    दूरसंचार: रिलायंस जियो, जो भारत की सबसे बड़ी टेलीकॉम कंपनी है।
    रिटेल: रिलायंस रिटेल, जो हजारों स्टोर और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म संचालित करती है।
    मीडिया और डिजिटल सेवाएं: वायाकॉम18 और जियो प्लेटफॉर्म्स।
    नवीकरणीय ऊर्जा: कंपनी ने 2035 तक नेट-जीरो कार्बन उत्सर्जन का लक्ष्य रखा है और सौर, पवन, और हरित हाइड्रोजन में निवेश कर रही है।
    इस लोन से रिलायंस अपनी नवीकरणीय ऊर्जा परियोजनाओं, डेटा सेंटर, और रिटेल विस्तार को और गति दे सकती है। उदाहरण के लिए, कंपनी ने असम में 50,000 करोड़ रुपये और महाराष्ट्र में 3 लाख करोड़ रुपये के निवेश की घोषणा की है।
  8. विवाद और अफवाहें
    सरकारी गारंटी की अफवाह: कुछ X पोस्ट में दावा किया गया कि इस लोन के लिए भारत सरकार गारंटर है। यह दावा गलत प्रतीत होता है, क्योंकि रिलायंस की क्रेडिट रेटिंग इतनी मजबूत है कि उसे सरकारी गारंटी की जरूरत नहीं है।
    कर्ज का बोझ: कुछ लोग रिलायंस के कर्ज को नकारात्मक रूप से देखते हैं, लेकिन यह एक सामान्य कॉर्पोरेट प्रथा है। रिलायंस का कर्ज-से-इक्विटी अनुपात स्वस्थ है, और कंपनी का राजस्व और मुनाफा कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त है।
  9. निष्कर्ष
    रिलायंस इंडस्ट्रीज द्वारा लिया गया 2.9 बिलियन डॉलर का लोन न केवल कंपनी की वित्तीय ताकत को दर्शाता है, बल्कि भारतीय उद्योगों की वैश्विक विश्वसनीयता को भी रेखांकित करता है। यह लोन पुराने कर्ज को चुकाने और नई परियोजनाओं में निवेश के लिए उपयोग किया जाएगा, जिससे रिलायंस की वृद्धि और भारत की आर्थिक प्रगति को बढ़ावा मिलेगा। 55 अंतरराष्ट्रीय बैंकों की भागीदारी इस डील को ऐतिहासिक बनाती है, और यह भारत के कॉर्पोरेट क्षेत्र के लिए एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है।
    स्रोत
    ब्लूमबर्ग, TV9 भारतवर्ष, IBC24, नवभारत टाइम्स, और अन्य विश्वसनीय समाचार स्रोत।

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