
📖 प्रस्तावना
कभी किसी ने बहुत गहरी बात कही है –
“यहाँ हर रिश्ता रिचार्ज जैसा है, जब तक बैलेंस है तब तक लोग संपर्क में रहते हैं।”
पहली नज़र में यह पंक्ति साधारण लगती है, लेकिन जब हम इसे जीवन के अनुभवों से जोड़ते हैं, तो यह हमारे समाज की सच्चाई को उजागर कर देती है। आज के इस आधुनिक दौर में रिश्ते भी मोबाइल की तरह हो गए हैं – जब तक उसमें बैलेंस है, तब तक कॉल और मैसेज आते रहते हैं… और जैसे ही बैलेंस खत्म, संपर्क भी खत्म।
🎙 प्रेरणादायक संदेश

मेरे प्यारे दर्शकों,
मैं राजेश लक्ष्मण गावड़े, आप सभी से दिल की गहराइयों से कुछ कहना चाहता हूँ।
आज इंसानियत से ज्यादा महत्व स्वार्थ को दिया जा रहा है। लोग रिश्तों को निभाने से ज्यादा उन्हें “यूज़” करने लगे हैं। जब तक फायदा है, तब तक साथ है; जब तक जरूरत है, तब तक प्यार है।
लेकिन क्या रिश्तों का यही अर्थ है?
रिश्ता कोई प्रीपेड सिम नहीं, जिसे जरूरत पड़ने पर रिचार्ज कर लिया जाए। रिश्ता तो वह विश्वास है, जो बिना शर्त के निभाया जाता है। रिश्ता वह धागा है, जो भरोसे और त्याग से मजबूत होता है।

💔 स्वार्थी रिश्तों की सच्चाई
आजकल कई लोग तब याद करते हैं,
जब उन्हें मदद चाहिए…
जब उन्हें सहारा चाहिए…
जब उन्हें फायदा चाहिए…
और जैसे ही उनका काम निकल जाता है,
वे फिर से “नो नेटवर्क” हो जाते हैं।
ऐसे रिश्ते केवल नाम के होते हैं।
इनमें अपनापन नहीं, केवल अपेक्षा होती है।
🌱 सच्चे रिश्तों की पहचान
सच्चा रिश्ता वह है—
जो आपके बुरे समय में भी आपके साथ खड़ा रहे।
जो आपकी चुप्पी को भी समझ ले।
जो बिना किसी स्वार्थ के आपका हाथ थामे।
जो आपकी असफलता में भी आपका हौसला बने।
रिश्तों का असली “बैलेंस” पैसा नहीं,
बल्कि विश्वास, सम्मान और समय है।
अगर आप अपने रिश्तों को समय नहीं देंगे,
तो वे धीरे-धीरे कमजोर हो जाएंगे।
🔥 जीवन का संदेश
मेरे दोस्तों,
अपने जीवन में ऐसे रिश्ते बनाइए जो किसी बैलेंस पर निर्भर न हों।
ऐसा प्यार दीजिए जो शर्तों पर आधारित न हो।
ऐसा विश्वास रखिए जो समय के साथ और मजबूत होता जाए।
अगर कोई व्यक्ति केवल आपके “बैलेंस” के कारण आपसे जुड़ा है,
तो समझ लीजिए वह रिश्ता नहीं, एक लेन-देन है।
पर अगर कोई बिना किसी लाभ के आपके साथ है,
तो वह आपका सच्चा अपना है।
🌸 आत्मचिंतन

आज अपने दिल से पूछिए—
क्या मैं भी किसी से केवल जरूरत के समय संपर्क करता हूँ?
क्या मैं भी रिश्तों को लाभ-हानि के तराजू में तोलता हूँ?
क्या मैं अपने अपनों को समय देता हूँ?
यदि उत्तर “हाँ” है,
तो आज से ही बदलाव की शुरुआत कीजिए।
रिश्तों को “रिचार्ज” नहीं,
“संस्कार” से चलाइए।
🌟 अंतिम संदेश

दर्शकों,
जीवन बहुत छोटा है।
पैसा, पद और प्रतिष्ठा सब यहीं रह जाएंगे।
साथ जाएगा तो केवल आपके अच्छे कर्म और सच्चे रिश्ते।
इसलिए अपने रिश्तों का बैलेंस बनाए रखिए—
लेकिन स्वार्थ से नहीं,
सच्चे प्रेम और विश्वास से।
याद रखिए—
रिश्ते जब दिल से निभाए जाते हैं,
तो कभी नेटवर्क नहीं खोते।
👇🏿
📢 यह प्रेरणादायक संदेश जन-जन तक पहुँचे, यही हमारी कामना है।

📰 जन कल्याण टाइम्स, मुंबई के माध्यम से प्रस्तुत

📸 प्रस्तुति: धनंजय राजेश गावड़े (Press Photographer)
🌐 Official Website: jankalyantime.in
–

