
भूमिका : एक ख़ामोश फ़कीर, जो युग की आवाज़ बन गया
भारत की मिट्टी में कुछ कहानियाँ लिखी नहीं जातीं—वे घटित होती हैं।
शिर्डी के साई बाबा ऐसी ही एक जीवंत घटना थे।
न कोई जाति, न मज़हब, न पहचान—फिर भी करोड़ों दिलों की धड़कन।
जब समाज धर्म के नाम पर बँट रहा था,
तब एक फ़कीर ने सिर्फ़ इतना कहा—
“सबका मालिक एक!”
और यही वाक्य इतिहास बन गया।
अध्याय 1 : रहस्यमय आगमन – नीम के पेड़ तले अवतरण
सन् 1854 के आसपास…
शिर्डी गाँव की सुबह वैसी ही थी—मिट्टी की सोंधी ख़ुशबू, बैलगाड़ियों की चरमराहट।
तभी गाँव के बाहर नीम के पेड़ के नीचे एक किशोर साधक दिखाई दिया—
आँखों में अथाह शांति, चेहरे पर मौन तपस्या।
पुजारी महालसापति ने उन्हें देखकर कहा—
“या साई!”
और यहीं से उस नाम ने जन्म लिया—साई बाबा।
न किसी ने पूछा—कौन हो?
न बाबा ने बताया—कहाँ से आए?
अध्याय 2 : द्वारकामायी – मस्जिद से मंदिर तक की यात्रा
बाबा ने एक टूटी-फूटी मस्जिद को अपना घर बनाया—
नाम दिया द्वारकामायी।
वहीं जलती रहती थी धुनी—
जो सिर्फ़ आग नहीं थी,
वो मानवता की लौ थी।
बाबा की दी हुई उदी (राख)
बीमारी में दवा बनी,
दुख में ढाल बनी,
और निराशा में उम्मीद।
हिंदू वहाँ राम देखते थे,
मुस्लिम वहाँ रहमान पाते थे—
और बाबा…
बस इंसानियत देखते थे।
अध्याय 3 : चमत्कार नहीं, करुणा का विज्ञान
एक रात तेल खत्म हो गया।
दीये बुझने वाले थे।
बाबा ने हँसते हुए कहा—
“पानी लाओ…”
और पानी से दीये जल उठे।
जब हैजा फैला—
बाबा ने गेहूँ पीसा,
आटे को गाँव की सीमाओं में डलवाया—
और महामारी रुक गई।
लोग कहते रहे—चमत्कार!
बाबा कहते रहे—
“श्रद्धा और सबूरी।”
अध्याय 4 : उपदेश नहीं, जीवन की पटकथा
बाबा प्रवचन नहीं देते थे—
वो जीकर सिखाते थे।
कभी भिक्षा माँगते,
कभी वही भिक्षा किसी भूखे को दे देते।
कहते—
“मैं पत्थर में नहीं,
मैं तुम्हारे विश्वास में हूँ।”
उनके दरबार में
न अमीर-गरीब था,
न ऊँच-नीच।
अध्याय 5 : महासमाधि – अंत नहीं, आरंभ
1918…
दीपावली की रात।
बाबा शांत लेटे थे।
आँखें बंद…
चेहरे पर वही मुस्कान।
उन्होंने शरीर छोड़ा—
पर आत्मा नहीं।
आज भी शिर्डी में
उनकी उपस्थिति महसूस होती है—
हर आँसू में,
हर दुआ में।
समापन : साईं बाबा – एक संत नहीं, एक विचार
साईं बाबा कोई मूर्ति नहीं—
वे एक चेतना हैं।
जब धर्म दीवार बने,
तो साईं सेतु बनते हैं।
आज के समय में
साईं का संदेश पहले से ज़्यादा ज़रूरी है—
इंसान बनो।
करुणा रखो।
सबका मालिक एक मानो।
जन कल्याण टाइम न्यूज़ के माध्यम से

जन-जन तक पहुँचे यही साई संदेश

प्रस्तुति : धनंजय राजेश गावड़े (प्रेस फ़ोटोग्राफ़र)

कलम : बॉलीवुड राइटर-डायरेक्टर राजेश भट्ट