
भारत के स्वतंत्रता संग्राम के सबसे तेजस्वी, निर्भीक और क्रांतिकारी नायक — नेताजी सुभाष चंद्र बोस की 129वीं जयंती के पावन अवसर पर भारतीय इतिहास और सिनेमा जगत में एक ऐतिहासिक और साहसिक पहल की घोषणा होने जा रही है।
23 जनवरी को प्रख्यात लेखक, वरिष्ठ पत्रकार एवं निर्माता मान सिंह दीप अपनी बहुप्रतीक्षित ऐतिहासिक फ़िल्म—
‘अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस’
के निर्माण की औपचारिक घोषणा करेंगे।
यह फ़िल्म मात्र एक बायोपिक नहीं, बल्कि भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के उस अनकहे, अनदेखे और दबाए गए सत्य को सामने लाने का प्रयास है, जिसे दशकों तक या तो नजरअंदाज़ किया गया या जानबूझकर इतिहास के हाशिए पर रखा गया।
नेताजी: आज़ाद हिंद फ़ौज के संस्थापक और अदम्य साहस के प्रतीक
नेताजी सुभाष चंद्र बोस केवल एक स्वतंत्रता सेनानी नहीं थे, बल्कि वे भारत की संप्रभुता, आत्मसम्मान और सशस्त्र संघर्ष के सबसे प्रखर विचारक थे।
उन्होंने यह सिद्ध कर दिया था कि—
“स्वतंत्रता केवल याचना से नहीं, बल्कि दृढ़ संकल्प, त्याग और संघर्ष से प्राप्त होती है।”
आज़ाद हिंद फ़ौज की स्थापना कर उन्होंने ब्रिटिश साम्राज्य की नींव हिला दी थी।
यह फ़िल्म उसी ऐतिहासिक सच्चाई को केंद्र में रखकर बनाई जा रही है।
स्थापित इतिहास को चुनौती देती एक साहसिक सिनेमाई पहल
‘अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस’ उन स्थापित ऐतिहासिक कथानकों को खुली चुनौती देती है, जिनमें भारत की आज़ादी को केवल एक ही विचारधारा तक सीमित कर दिया गया।
फ़िल्म यह सवाल उठाती है—
क्या भारत की स्वतंत्रता की निर्णायक लड़ाई केवल अहिंसा तक सीमित थी?
क्या नेताजी सुभाष चंद्र बोस की भूमिका को जानबूझकर कम करके आंका गया?
क्या उनकी मृत्यु वास्तव में एक दुर्घटना थी, या इसके पीछे कोई अंतरराष्ट्रीय साज़िश छिपी है?
फ़िल्म का स्पष्ट दावा है कि भारत की आज़ादी की वास्तविक निर्णायक भूमिका नेताजी सुभाष चंद्र बोस और आज़ाद हिंद फ़ौज की थी, जिसे इतिहास में वह स्थान नहीं मिला, जिसकी वह वास्तविक हक़दार थी।
द्वितीय विश्व युद्ध और वैश्विक सत्ता-राजनीति का अनकहा सच
इस फ़िल्म में यह भी दर्शाया जाएगा कि द्वितीय विश्व युद्ध के बाद उभरी वैश्विक शक्तियाँ नेताजी के विचारों और उनकी अपार लोकप्रियता से किस कदर भयभीत थीं।
फ़िल्म के अनुसार—
नेताजी का जीवित रहना कई अंतरराष्ट्रीय शक्तियों के लिए असहज था
उनके समाजवादी, राष्ट्रवादी और सैन्य दृष्टिकोण से वैश्विक सत्ता-संतुलन को गंभीर खतरा था
इसी कारण एक सुनियोजित षड्यंत्र के तहत उनकी नृशंस हत्या की गई
और उस हत्या को दशकों तक दुर्घटना और रहस्य के आवरण में छुपाकर रखा गया
यह फ़िल्म उन रहस्यों से पर्दा उठाने का साहसिक प्रयास है।
गहन शोध और अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ों पर आधारित फ़िल्म
‘अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस’ किसी कल्पना पर नहीं, बल्कि—
उपलब्ध अंतरराष्ट्रीय दस्तावेज़ों
ऐतिहासिक साक्ष्यों
गोपनीय रिपोर्ट्स
और दशकों से दबाए गए तथ्यों
पर आधारित है।
फ़िल्म का दावा है कि इसमें प्रस्तुत तथ्य न केवल इतिहास की प्रचलित धारणाओं को झकझोरेंगे, बल्कि वर्तमान वैश्विक भू-राजनीति की जड़ों तक गंभीर प्रश्न खड़े करेंगे।
निर्माण और निर्देशन की सशक्त टीम
इस महत्वाकांक्षी ऐतिहासिक परियोजना को सशक्त बना रही है एक अनुभवी टीम—
प्रस्तुतकर्ता: मान सिंह दीप
निर्माता: कल्याणी सिंह एवं वेदांत सिंह
निर्देशक: अशोक त्यागी
निर्देशक अशोक त्यागी अपनी यथार्थवादी, तथ्यपरक और सशक्त कहानी कहने की शैली के लिए जाने जाते हैं, जिससे यह फ़िल्म भावनात्मक होने के साथ-साथ ऐतिहासिक रूप से भी अत्यंत मज़बूत होगी।
निर्माता का वक्तव्य
फ़िल्म की निर्माता कल्याणी सिंह के अनुसार—
“‘अनटोल्ड ट्रुथ ऑफ़ सुभाष चंद्र बोस’ केवल अतीत की कहानी नहीं है। यह फ़िल्म देशवासियों को इतिहास को नए दृष्टिकोण से देखने का अवसर देगी और राष्ट्रवाद, बलिदान व सच्ची स्वतंत्रता के अर्थ पर पुनर्विचार करने को विवश करेगी।”
आने वाली पीढ़ियों के लिए एक वैचारिक विरासत
यह फ़िल्म आने वाली पीढ़ियों के लिए—
नेताजी के विचारों
उनके संघर्ष
उनके बलिदान
और उनके अधूरे सपनों
को नई चेतना, नई ऊर्जा और नए दृष्टिकोण के साथ प्रस्तुत करेगी।
यह केवल एक फ़िल्म नहीं—
यह इतिहास से संवाद है।
प्रस्तुति: काली दास पाण्डेय
यह जानकारी जन-जन तक पहुँचाने हेतु —

जन कल्याण टाइम न्यूज़, मुंबई
विशेष सहयोग एवं संपादन:

राजेश लक्ष्मण गवाडे
(Editor-in-Chief, Jan Kalyan Time News)