
इस दुनिया में हर इंसान दो ही रास्तों में से एक रास्ता चुनता है।
पहला रास्ता—मूर्खता का,
दूसरा रास्ता—समझदारी का।
मूर्खों का काम होता है
दूसरों के बारे में सोचना,
दूसरों की ज़िंदगी में झांकना,
दूसरों की कमियों पर चर्चा करना,
और इसी चक्कर में
खुद को रोज़-रोज़ थोड़ा-थोड़ा बर्बाद करते जाना।
वह हर वक़्त यह सोचता है—
“वो आगे कैसे बढ़ गया?”
“उसके पास इतना सब कैसे है?”
“लोग उसकी तारीफ क्यों कर रहे हैं?”
और इसी जलन, तुलना और शिकायतों की आग में
उसका अपना आत्मविश्वास,
उसकी मेहनत
और उसका भविष्य
सब जलकर राख हो जाता है।

**मूर्ख आदमी दूसरों की ज़िंदगी की किताब पढ़ता रहता है,
और अपनी ज़िंदगी की किताब को कोरा ही छोड़ देता है।**

अब ज़रा समझदार इंसान को देखिए।
समझदार का काम होता है—
खुद के बारे में सोचना,
अपनी कमियों को पहचानना,
अपने हुनर को तराशना,
और हर हाल में
खुद को आबाद करना।
वह दूसरों से जलता नहीं,
बल्कि दूसरों से सीखता है।
वह शिकायत नहीं करता,
बल्कि संघर्ष करता है।
वह समय बर्बाद नहीं करता,
बल्कि समय को निवेश करता है।
समझदार इंसान जानता है—
अगर मुझे आगे बढ़ना है
तो मुझे खुद पर काम करना होगा,
क्योंकि
दूसरों को नीचा दिखाकर
कोई भी कभी ऊँचा नहीं उठा।
**जो लोग तुम्हारी बुराई में व्यस्त हैं,
समझ लो वे अपनी ज़िंदगी से खाली हैं।
और जो लोग अपनी ज़िंदगी बनाने में लगे हैं,
उन्हें तुम्हारी बुराई सुनने का
वक़्त ही नहीं होता।**
आज का सबसे बड़ा सच यही है—
जो इंसान हर वक़्त
“लोग क्या कहेंगे” में जीता है,
वह कभी
“मैं क्या बनूँगा” तक
नहीं पहुँच पाता।
और जो यह ठान लेता है कि—
“मुझे खुद को बनाना है”,
उसे फिर दुनिया की बातें
हिला नहीं पातीं।
याद रखिए—
मूर्ख भीड़ में खुशियाँ ढूँढता है
समझदार अकेले में लक्ष्य बनाता है
मूर्ख तालियों के पीछे भागता है
समझदार इतिहास रचता है
मूर्ख दूसरों की सफलता से जलता है
समझदार अपनी मेहनत से चमकता है

आज अगर आप इस संदेश को पढ़ रहे हैं,
तो खुद से एक सवाल पूछिए—
क्या मैं दूसरों की ज़िंदगी पर
नज़र रखने में व्यस्त हूँ,
या अपनी ज़िंदगी को
ऊँचाई देने में?
फैसला आपका है,
क्योंकि
भविष्य भी आपका है।
अंतिम संदेश
दूसरों के बारे में सोचने से
कोई महान नहीं बनता,
लेकिन
खुद के बारे में सही समय पर सोचना
इंसान को असाधारण बना देता है।

– राजेश लक्ष्मण गवाडे
Editor in Chief
Jan Kalyan Time News, Mumbai