
आज सुबह मुझे ओशो (Rajneesh) जी की एक बात याद आई — और मैंने सोचा क्यों न इस बात को आपके सामने एक छोटे से, लेकिन दिल से निकले संदेश के रूप में पहुंचाया जाए। यह संदेश किसी धार्मिक उपदेश से नहीं, बल्कि एक साधारण जीवन-संदेश से है — जो हर उस इंसान के काम आएगा जो थका हुआ महसूस कर रहा है, हताशा में है, या फिर बस एक नए आरम्भ की तलाश में है।
शुरू करते हैं—
दोस्तो, ज़िन्दगी बाहर के नुस्ख़ों से नहीं, भीतर की जागरूकता से बदलती है। हम अक्सर अभी और यहाँ के पलों को खोकर भविष्य की चिंता और अतीत के बोझ में उलझे रहते हैं। ओशो जी भी बार-बार यही कहते थे — असली आज़ादी, सच्ची खुशियाँ और शक्ति हमारे अंदर जन्म लेती हैं, जब हम खुद को समझना शुरू करते हैं।

यदि आप आज थके हुए महसूस कर रहे हैं — एक छोटी सी साँस लें। यही सरल कदम आपका पहला कदम होगा। साँस पर ध्यान लाना — यह कोई जादू नहीं, पर यह आपको आपके भीतर ले आता है। जब आप भीतर आते हैं, आप पाते हैं कि डर, चिंता या दुख अस्थायी हैं — और आपके अंदर एक स्थिरता है, जो हमेशा बनी रहती है।
अब कुछ व्यवहारिक बातें — जिन्हें आप आज ही आजमाकर देख सकते हैं:

- सुबह का पाँच मिनट अपने लिए निकालिए — फोन को दूर रखिए, आंखें मूंद कर गहरी साँसें लें। यह पाँच मिनट हर रोज़ आपके दिन का टोन बदल देंगे।
- छोटी-छोटी जिम्मेदारियों में भी पूर्णता से जीना सीखिए — एक काम को ठीक से पूरा करना, रिवाज नहीं बल्कि कला है। यह आत्मविश्वास बढ़ाता है।
- दूसरों के साथ प्रतिस्पर्धा छोड़ कर अपनी रफ्तार पर ध्यान दीजिए — आपकी तुलना किसी और से कर के आप अपनी ऊर्जा बर्बाद करते हैं।
- हर अड़चन को सीखने का अवसर समझिए — विफलता वह शिक्षक है जो हमें मजबूत बनाती है।
- प्यार और संबंधों में सच्चाई रखें — दिखावा और बनावटीपन आपके भीतर अशांति पैदा करते हैं; सादगी से जीवन खूबसूरत बन जाता है।

याद रखिए— बड़े बदलाव एक पल में नहीं आते। पर छोटे छोटे कदम जोड़ कर, रोज़ थोड़ा बेहतर बनना, एक दिन बड़े बदलाव दे देता है। ओशो जी की सीख यही थी कि “जिंदगी को अनुभव करो, उसे सोच-समझकर जियो, और अपनी असलियत से जुड़ो” — यानी भीतर की आवाज़ सुनो और उसी के अनुसार आगे बढ़ो।
अंत में एक छोटा सा संदेश — अगर आज आपका मन भारी है, तो यह सोच कर मुस्कुराएँ कि आप अकेले नहीं हैं। हर दिल में कभी न कभी उठने वाला यह सवाल आता है — “मैं कौन हूँ? मैं क्या कर रहा हूँ?” — और इसका उत्तर धीरे-धीरे मिलने लगेगा जब आप ईमानदारी से खुद के साथ बैठना सीख लें।