

Krishnakant Eknath piyaji
(Press photographer Goa)

चित्र में एक बहुत गहरी सच्चाई छिपी हुई है।
👉 आज हमारे देश में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाए जा रहे हैं। इन कैमरों का सबसे बड़ा काम है – यह देखना कि कौन व्यक्ति ट्रैफिक नियम तोड़ रहा है और किसका चालान काटना है।
➡️ हेलमेट नहीं पहना, सीट बेल्ट नहीं लगाई, ट्रिपल सीट चलाया या ज़रा-सा नियम तोड़ा – तो तुरंत चालान आपके घर पहुँच जाता है।

✅ ये तकनीक सही भी है, क्योंकि नियम तो सबको मानने चाहिए।
लेकिन सवाल ये है कि –
❌ जब सड़क पर गड्ढे होते हैं,
❌ जब बारिश में सड़कें तालाब बन जाती हैं,
❌ जब टूटी सड़कें लोगों की जान ले लेती हैं,
तो फिर ये कैमरे क्यों नहीं दिखाते कि सड़क की हालत कितनी खराब है❓

🚩 सच्चाई ये है :
हमारे देश में चालान काटने का सिस्टम मज़बूत है,
लेकिन सड़क बनाने और उसकी मरम्मत करने का सिस्टम कमजोर है।
एक छोटा-सा नियम तोड़ने पर तुरंत जुर्माना लग जाता है,
लेकिन सड़क पर बने गड्ढे से अगर कोई दुर्घटना हो जाए तो जिम्मेदारी किसकी होगी❓
कितने लोग अपनी जान गंवा देते हैं, कितने लोग घायल हो जाते हैं – लेकिन इस पर कोई कार्रवाई नहीं होती।

⚖️ जनता की मांग :
- जैसे चालान काटने के लिए कैमरे लगे हैं, वैसे ही सड़क की हालत मॉनिटर करने के लिए भी कैमरे लगने चाहिए।
- हर गड्ढे की तस्वीर रोज़ाना नगरपालिका और सरकार तक पहुँचे।
- जिस सड़क पर गड्ढे ज्यादा हैं, वहाँ के जिम्मेदार अधिकारियों पर भी उतना ही जुर्माना लगे, जितना चालान आम जनता पर लगता है।
- सड़क की खराब स्थिति से हुई दुर्घटनाओं का मुआवज़ा सरकार और प्रशासन दे।

🙏 जनहित में संदेश :
नियमों का पालन ज़रूरी है –
लेकिन सिर्फ जनता के लिए ही नहीं, सरकार और प्रशासन के लिए भी नियम होने चाहिए।
🚦 जब तक सड़कें सुरक्षित नहीं होंगी, तब तक ट्रैफिक नियम अधूरे रहेंगे।
🚧 जनता का पैसा टैक्स और चालान के रूप में जाता है, तो उसका इस्तेमाल सुरक्षित सड़क बनाने में होना चाहिए।
✍️ आवाज़ उठाइए, जागरूक बनिए, और सुरक्षित भारत बनाने में सहयोग कीजिए।
जनहित में जारी 🛑🇮🇳