

राजेश लक्ष्मण गावड़े
मुख्य संपादक (जन कल्याण टाइम)
यह कारोबार न केवल वायु प्रदूषण की गंभीर समस्या से निपटने का प्रयास है, बल्कि इसमें आर्थिक अवसर, रोजगार सृजन और नवाचार की अपार संभावनाएं भी छिपी हैं। इस लेख में हम शुद्ध हवा के कारोबार के विभिन्न पहलुओं, इसके कारणों, विकास, चुनौतियों और भविष्य की संभावनाओं को विस्तार से समझेंगे।
- शुद्ध हवा के कारोबार का उदय: पृष्ठभूमि
वायु प्रदूषण आज विश्व की सबसे बड़ी पर्यावरणीय और स्वास्थ्य चुनौतियों में से एक है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के अनुसार, हर साल लगभग 70 लाख लोग वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों जैसे अस्थमा, हृदय रोग, फेफड़ों के कैंसर और स्ट्रोक से मृत्यु को प्राप्त होते हैं। भारत जैसे देशों में, विशेष रूप से दिल्ली, मुंबई, कोलकाता जैसे महानगरों में, वायु गुणवत्ता सूचकांक (AQI) अक्सर ‘गंभीर’ या ‘अस्वास्थ्यकर’ स्तर पर पहुंच जाता है।
इस संकट ने लोगों को शुद्ध हवा की आवश्यकता और इसके लिए समाधान खोजने की ओर प्रेरित किया है। नतीजतन, शुद्ध हवा से संबंधित उत्पादों और सेवाओं का बाजार तेजी से बढ़ रहा है। यह कारोबार निम्नलिखित क्षेत्रों में फैल रहा है:

एयर प्यूरीफायर और फिल्टर: घरों, कार्यालयों और वाहनों के लिए।
वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरण: स्मार्ट सेंसर और ऐप्स।
आउटडोर वायु शुद्धिकरण: स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स और बड़े पैमाने पर फिल्टर टावर।
स्वास्थ्य और वेलनेस: शुद्ध हवा आधारित रिट्रीट और टूरिज्म।
हरित प्रौद्योगिकी: पेड़ लगाने, सौर ऊर्जा और पर्यावरण-अनुकूल उत्पाद।- शुद्ध हवा के कारोबार के प्रमुख क्षेत्र
(क) एयर प्यूरीफायर और वायु शुद्धिकरण उपकरण
एयर प्यूरीफायर आज शुद्ध हवा के कारोबार का सबसे बड़ा और सबसे लोकप्रिय हिस्सा हैं। ये उपकरण हवा से धूल, PM2.5, PM10, एलर्जी कारक, बैक्टीरिया और वायरस को हटाने के लिए HEPA फिल्टर, एक्टिवेटेड कार्बन और UV तकनीक का उपयोग करते हैं। भारत में, विशेष रूप से सर्दियों के महीनों में जब स्मॉग और प्रदूषण चरम पर होता है, इनकी मांग कई गुना बढ़ जाती है।
प्रमुख ब्रांड्स: Philips, Dyson, Xiaomi, Blueair, Honeywell, और भारतीय ब्रांड जैसे Eureka Forbes और Kent।
बाजार आकार: एक रिपोर्ट के अनुसार, भारत में एयर प्यूरीफायर का बाजार 2023 में लगभग 700 करोड़ रुपये का था और 2028 तक इसके 1500 करोड़ रुपये तक पहुंचने की उम्मीद है।
नवाचार: स्मार्ट एयर प्यूरीफायर जो मोबाइल ऐप्स से नियंत्रित होते हैं, वास्तविक समय में AQI डेटा प्रदान करते हैं और स्वचालित रूप से हवा की गुणवत्ता के आधार पर काम करते हैं।
(ख) वायु गुणवत्ता निगरानी उपकरण
वायु प्रदूषण के प्रति जागरूकता बढ़ने के साथ, लोग अब अपने आसपास की हवा की गुणवत्ता को मापना चाहते हैं। इसके लिए स्मार्ट सेंसर, पोर्टेबल मॉनिटर और ऐप-आधारित उपकरणों का उपयोग हो रहा है।
उदाहरण: IQAir, Prana Air, और BreezoMeter जैसे ब्रांड वास्तविक समय में PM2.5, PM10, CO2, और अन्य प्रदूषकों का डेटा प्रदान करते हैं।
उपयोग: स्कूल, अस्पताल, कार्यालय और स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में इन उपकरणों की मांग बढ़ रही है।
लाभ: ये उपकरण लोगों को प्रदूषण के स्तर के आधार पर सावधानी बरतने में मदद करते हैं, जैसे मास्क पहनना या बाहर न निकलना।
(ग) आउटडोर वायु शुद्धिकरण
शहरी क्षेत्रों में बड़े पैमाने पर वायु शुद्धिकरण के लिए नवाचार हो रहे हैं। इसमें स्मॉग टावर, ड्रोन-आधारित शुद्धिकरण, और हरित दीवारें शामिल हैं।
स्मॉग टावर: दिल्ली में स्मॉग टावर स्थापित किए गए हैं जो बड़े पैमाने पर हवा को फिल्टर करते हैं। हालांकि, इनकी प्रभावशीलता और लागत पर अभी भी बहस जारी है।
स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: भारत की स्मार्ट सिटी परियोजनाओं में वायु गुणवत्ता निगरानी और शुद्धिकरण को प्राथमिकता दी जा रही है।
हरित दीवारें: इमारतों पर पौधों की दीवारें जो हवा को प्राकृतिक रूप से शुद्ध करती हैं।
(घ) स्वास्थ्य और वेलनेस टूरिज्म
शुद्ध हवा अब एक लग्जरी के रूप में देखी जा रही है। लोग प्रदूषित शहरों से दूर, हिमालय, दक्षिण भारत के जंगलों या अन्य प्राकृतिक स्थानों पर छुट्टियां बिताने के लिए जा रहे हैं।
उदाहरण: उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और केरल जैसे क्षेत्रों में ‘क्लीन एयर रिट्रीट’ की मांग बढ़ रही है।
वेलनेस रिसॉर्ट्स: ये रिसॉर्ट्स शुद्ध हवा, ऑक्सीजन थेरेपी और डिटॉक्स प्रोग्राम्स पर जोर दे रहे हैं।
आर्थिक प्रभाव: यह टूरिज्म उद्योग को बढ़ावा दे रहा है और स्थानीय समुदायों के लिए रोजगार सृजित कर रहा है।
(ङ) हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास
शुद्ध हवा का कारोबार केवल उपकरणों तक सीमित नहीं है। यह हरित प्रौद्योगिकी और सतत विकास के साथ भी जुड़ा है।
पेड़ लगाने की पहल: कई कंपनियां और स्टार्टअप्स बड़े पैमाने पर वृक्षारोपण कर रहे हैं, जो हवा को शुद्ध करने का प्राकृतिक तरीका है।

- सौर ऊर्जा: सौर ऊर्जा से चलने वाले प्यूरीफायर और वायु निगरानी उपकरण पर्यावरण-अनुकूल समाधान प्रदान करते हैं।
इलेक्ट्रिक वाहन: प्रदूषण कम करने के लिए इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देना भी इस कारोबार का हिस्सा है। - शुद्ध हवा के कारोबार के पीछे प्रेरक शक्तियां
(क) बढ़ता वायु प्रदूषण
भारत में वाहनों, उद्योगों, निर्माण गतिविधियों और फसल अवशेष जलाने जैसे कारकों ने वायु प्रदूषण को खतरनाक स्तर तक पहुंचा दिया है।
दिल्ली का AQI अक्सर 300 से ऊपर रहता है, जो ‘गंभीर’ श्रेणी में आता है। यह स्वास्थ्य के लिए खतरा है, खासकर बच्चों और बुजुर्गों के लिए।
(ख) स्वास्थ्य जागरूकता
लोग अब वायु प्रदूषण और स्वास्थ्य के बीच संबंध को समझ रहे हैं। अस्थमा, एलर्जी और फेफड़ों की बीमारियों के मामले बढ़ने से शुद्ध हवा की मांग बढ़ी है।
कोविड-19 महामारी ने भी स्वच्छ हवा के महत्व को रेखांकित किया, क्योंकि वायरस हवा के माध्यम से फैल सकता है।
(ग) तकनीकी प्रगति
IoT (Internet of Things), AI और डेटा एनालिटिक्स ने वायु शुद्धिकरण और निगरानी को अधिक प्रभावी और सुलभ बनाया है।
स्टार्टअप्स और तकनीकी कंपनियां इस क्षेत्र में नए-नए समाधान पेश कर रही हैं।
(घ) सरकारी नीतियां और जागरूकता अभियान
भारत सरकार ने राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP) शुरू किया है, जिसका लक्ष्य 2024 तक प्रमुख शहरों में प्रदूषण को 20-30% कम करना है।
प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और गैर-सरकारी संगठन भी जागरूकता फैलाने में सक्रिय हैं। - शुद्ध हवा के कारोबार की चुनौतियां
(क) उच्च लागत
उच्च गुणवत्ता वाले एयर प्यूरीफायर और निगरानी उपकरण महंगे होते हैं, जिसके कारण यह मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ नहीं है।
स्मॉग टावर जैसी परियोजनाओं की स्थापना और रखरखाव की लागत भी बहुत अधिक है।
(ख) जागरूकता की कमी
ग्रामीण और छोटे शहरों में लोग अभी भी वायु प्रदूषण के खतरों और शुद्ध हवा के समाधानों से पूरी तरह अवगत नहीं हैं।
(ग) तकनीकी सीमाएं
स्मॉग टावर और अन्य बड़े पैमाने के समाधान अभी तक पूरी तरह प्रभावी साबित नहीं हुए हैं।
सस्ते प्यूरीफायर की गुणवत्ता अक्सर संदिग्ध होती है, जिससे उपभोक्ताओं का भरोसा कम होता है।
(घ) नीतिगत और नियामक बाधाएं
प्रदूषण नियंत्रण के लिए सख्त नियमों का कार्यान्वयन अभी भी अपर्याप्त है।
विभिन्न राज्यों और शहरों में नीतियों का समन्वय न होना भी एक समस्या है। - शुद्ध हवा के कारोबार की भविष्य की संभावनाएं
(क) बाजार विस्तार
भारत और अन्य विकासशील देशों में शुद्ध हवा का बाजार तेजी से बढ़ेगा, क्योंकि शहरीकरण और औद्योगिकीकरण के साथ प्रदूषण की समस्या और गंभीर होगी।
ग्रामीण और अर्ध-शहरी क्षेत्रों में भी इसकी मांग बढ़ने की संभावना है।
(ख) किफायती समाधान
स्टार्टअप्स और कंपनियां सस्ते और प्रभावी उपकरण विकसित कर रही हैं, जो मध्यम और निम्न आय वर्ग के लिए सुलभ होंगे।
DIY (Do-It-Yourself) प्यूरीफायर और प्राकृतिक समाधान जैसे पौधों का उपयोग भी लोकप्रिय हो रहा है।
(ग) स्मार्ट सिटी और शहरी नियोजन
स्मार्ट सिटी परियोजनाएं वायु गुणवत्ता को प्राथमिकता दे रही हैं, जिससे बड़े पैमाने पर शुद्धिकरण और निगरानी प्रणालियों की मांग बढ़ेगी।
हरित भवन और पर्यावरण-अनुकूल डिजाइन को बढ़ावा मिलेगा।
(घ) वैश्विक सहयोग
भारत और अन्य देश वायु प्रदूषण से निपटने के लिए तकनीकी और नीतिगत सहयोग बढ़ा रहे हैं। उदाहरण के लिए, Google जैसे संगठन प्रोजेक्ट एयर व्यू के माध्यम से वायु गुणवत्ता डेटा प्रदान कर रहे हैं।
(ङ) रोजगार और नवाचार
शुद्ध हवा का कारोबार स्टार्टअप्स, इंजीनियरों, डेटा वैज्ञानिकों और पर्यावरण विशेषज्ञों के लिए रोजगार के अवसर पैदा कर रहा है।
ड्रोन, AI और बायोटेक्नोलॉजी जैसे क्षेत्रों में नए समाधान सामने आ रहे हैं। - व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर कदम
शुद्ध हवा का कारोबार केवल कंपनियों और सरकारों की जिम्मेदारी नहीं है। व्यक्तिगत और सामुदायिक स्तर पर भी कई कदम उठाए जा सकते हैं:
एयर प्यूरीफायर का उपयोग: घरों और कार्यालयों में HEPA फिल्टर वाले उपकरण लगाएं।
पौधे लगाएं: तुलसी, एलोवेरा, और स्नेक प्लांट जैसे हवा को शुद्ध करने वाले पौधे घर में रखें।
सार्वजनिक परिवहन: निजी वाहनों के बजाय मेट्रो, बस या साइकिल का उपयोग करें।
जागरूकता फैलाएं: अपने समुदाय में वायु प्रदूषण के खतरों और समाधानों के बारे में चर्चा करें।
हरित पहल का समर्थन: वृक्षारोपण और पर्यावरण संरक्षण से जुड़े अभियानों में भाग लें। - निष्कर्ष
शुद्ध हवा का बढ़ता कारोबार न केवल एक आर्थिक अवसर है, बल्कि यह मानव स्वास्थ्य, पर्यावरण संरक्षण और सतत विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। वायु प्रदूषण की गंभीर चुनौती से निपटने के लिए तकनीकी नवाचार, सरकारी नीतियां, और सामुदायिक सहभागिता का समन्वय आवश्यक है। भारत जैसे देश में, जहां प्रदूषण एक दैनिक समस्या है, शुद्ध हवा का कारोबार न केवल जीवन की गुणवत्ता को बेहतर बना सकता है, बल्कि यह एक नई हरित अर्थव्यवस्था की नींव भी रख सकता है।
आने वाले वर्षों में, यदि हम सही दिशा में प्रयास करें, तो शुद्ध हवा एक विलासिता नहीं, बल्कि हर व्यक्ति का अधिकार बन सकती है।
संदर्भ:
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की वायु प्रदूषण संबंधी रिपोर्ट।
भारत सरकार का राष्ट्रीय स्वच्छ वायु कार्यक्रम (NCAP)।
IQAir और Prana Air जैसी कंपनियों के वायु गुणवत्ता डेटा।




