
मुंबई। बॉम्बे हाई कोर्ट ने साफ किया है कि विकास कार्यों के लिए किसी की भूमि का अधिग्रहण बिना उचित मुआवजा दिए नहीं किया जा सकता। अदालत ने डहाणु नगर परिषद को सड़क निर्माण के लिए अधिग्रहित भूमि के बदले पूर्णिमा टॉकीज के मालिक को मुआवजा देने का आदेश दिया है।
न्यायमूर्ति जी.एस. कुलकर्णी और न्यायमूर्ति अद्वैत सेथना की पीठ ने इस मामले में डहाणु नगर परिषद के 23 जुलाई 2023 के आदेश को रद्द कर दिया, जिसमें भूमि मालिक को मुआवजा देने से इनकार किया गया था।
अधिग्रहण में कानूनी प्रक्रिया का उल्लंघन
कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि नगर परिषद ने वैध अधिग्रहण की प्रक्रिया अपनाने के बजाय याचिकाकर्ता की दीवार को गिरा दिया और मुआवजा नहीं दिया, जो कानून का उल्लंघन है। अदालत ने इसे अनुच्छेद 300 (ए) के तहत याचिकाकर्ता के संवैधानिक अधिकारों का हनन माना।
पीठ ने स्पष्ट किया कि बिना समझौते के आरक्षित भूमि को एमआरटीपी अधिनियम की धारा 126(1) के तहत अधिग्रहित नहीं किया जा सकता। यदि कानूनी प्रक्रिया का पालन नहीं किया गया, तो मुआवजे का भुगतान 2013 अधिनियम के प्रावधानों के तहत किया जाएगा।
मामले की पृष्ठभूमि
पूर्णिमा टॉकीज के मालिक हेमंत माली ने अपनी याचिका में बताया कि 1939 में उनके परिवार को यह भूमि अनुदान में मिली थी। 1993 में सरकार ने उन्हें सुरक्षा के लिए दीवार बनाने की अनुमति दी थी। 2022 में नगर परिषद ने सड़क चौड़ीकरण के लिए उन्हें नोटिस जारी किया। उन्होंने सहमति जताई लेकिन मुआवजे की मांग की, जिसे ठुकरा दिया गया और उनकी दीवार गिरा दी गई। इसके बाद उन्होंने हाई कोर्ट का रुख किया, जहां से उन्हें राहत मिली।
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