मुंबई: मानव तस्करी से जुड़े मामले को लेकर पुलिस ने बड़ा खुलासा किया है। पुलिस की जांच में सामने आया कि फर्जी दस्तावेजों या फिर अन्य संदिग्ध तरीकों से वीजा प्राप्त कर रोजगार के लिए जम्मू क्षेत्र से पिछले कुछ सालों में कई लोग दक्षिण कोरिया गए है। मामले की जांच में शामिल एक अधिकारी ने यह जानकारी दी है।
आपको पता हो कि पिछले हफ्ते मुंबई पुलिस की क्राइम ब्रांच ने एक गिरोह का भंडाफोड़ किया था और इस गिरोह के 5 लोगों को गिरफ्तार भी किया था। जिनमें दो नेवी के ऑफिसर भी थे। यह गिरोह गिरोह दक्षिण कोरिया में काम की तलाश कर रहे लोगों को फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वीजा दिलवाने का काम करता था।
नौसेना के दो अधिकारियों समेत 5 गिरफ्तार
एक अधिकारी ने बुधवार को बताया कि यह गिरोह पिछले एक साल में कम से कम आठ लोगों को दक्षिण कोरिया भेजने में कामयाब रहा, हालांकि उनमें से दो को वापस भारत भेज दिया गया। मुंबई अपराध शाखा ने इस मामले में अब तक नौसेना के दो अधिकारियों लेफ्टिनेंट कमांडर विपिन डागर और सब लेफ्टिनेंट ब्रह्म ज्योति के साथ सिमरन तेजी, रवि कुमार और दीपक डोगरा को गिरफ्तार किया है। यह गिरोह पिछले साल मई से सक्रिय था।
ब्रह्म ज्योति था गिरोह का सरगना
अधिकारी ने बताया कि जांच के दौरान यह भी सामने आया कि जम्मू जिले के रणबीर सिंह पोरा तहसील के सुचेतगढ़ से कई लोग पिछले कुछ वर्षों में इसी तरह (विभिन्न गिरोहों की मदद से) से दक्षिण कोरिया गए थे। उन्होंने बताया कि पर्यटक वीजा पर यात्रा करने के बाद वे दक्षिण कोरिया में कारखानों और निर्माण स्थलों पर दिहाड़ी मजदूर के रूप में काम करते हैं। अधिकारी ने बताया कि दक्षिण कोरिया में मजदूरी भारत की तुलना में बहुत अधिक है, इसलिए अवैध श्रमिकों के लिए कोरियाई देश एक आकर्षक गंतव्य बना हुआ है। पुलिस ने दो दिन पहले दावा किया था कि गिरोह का सरगना ब्रह्म ज्योति था, जिसे पिछले सप्ताह गिरफ्तार किया गया।
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