एक छोटी सी चिनगारी को दावानल बनते देर नहीं लगती। पहले भी छोटी प्रतीत होनेवाली लड़ाइयां बढ़कर महाविनाशक विश्वयुद्ध में बदलती देखी गईं। 1914-17 का प्रथम विश्वयुद्ध हो या 1939-45 का सेकंड वर्ल्ड वार, मानवता के लिए कलंक रहे हैं। जब राजनेता विवेक खोकर खून के प्यासे हो जाते हैं तो युद्ध को टाला नहीं जा सकता। आज का वैश्विक परिदृश्य सचमुच चिंताजनक है। एक ओर रूस-यूक्रेन युद्ध 1 वर्ष से भी अधिक समय से जारी है जिससे जन-धन की भारी क्षति हुई है वहीं दूसरी ओर इजराइल का संघर्ष सिर्फ हमास व फिलस्तीन तक सीमित न रहकर ईरानी आतंकी संगठन हिजबुल्लाह से भी होने लगा है। मध्य-पूर्व की यह लड़ाई यदि और भड़की तो दुनिया तीसरे विश्व युद्ध की ओर जा सकती है। इजराइल तो अमेरिका के कहने पर भी मान नहीं रहा और हमास को पूरी तरह नेस्तनाबूत करने पर तुला हुआ है।
हिजबुल्ला ने रॉकेट दागे
ईरान समर्थित आतंकवादी संगठन हिजबुल्लाह ने उत्तरी इजराइल पर 40 रॉकेट दागे लेकिन हमास के अचानक किए गए हमले से सीख ले चुके इजराइली आयरन डोम, एरो व पैट्रियाट मिसाइल ने इस हमले को नाकाम कर दिया। इजराइल पर किलर ड्रोन और सैकड़ों मिसाइल दागने के बाद ईरान कहता है कि हमारा बदला पूरा हो गया। खुद शरारत करने के बाद अब ईरान संयुक्त राष्ट्र चार्टर के अनुच्छेद 51 का उल्लेख करते हुए शांति की गुहार लगा रहा है। उसे डर लगता रहा है कि इजराइल की मदद करते हुए कहीं अमेरिका ईरान पर न टूट पड़े। इजराइल पर ईरानी हमले के बीच जॉर्डन ने अपने यहां आपात काल लागू कर दिया है। उधर अमेरिका को भी लग रहा है कि इस चुनाव वर्ष में इजराइल उसे मध्य-पूर्व की जंग में खींचना चाहता है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने एक बार फिर इजराइल के पीएम बेंजामिन नेतन्याहू को फटकार लगाई है कि वह तनाव भड़कने न दें।
अमेरिका ने भी कमर कसी
अमेरिका ने अपने 2 युद्धपोत भूमध्य सागर में तैनात करते हुए मिडिल ईस्ट के अमेरिकी फौजी ठिकानों पर अपने सैनिकों की तादाद बढ़ा दी है। अमेरिका ने दोहराया कि वह अपने सहयोगियों की मदद के लिए सभी जरूरी कदम उठाएगा। इजराइली सेना के प्रवक्ता ने कहा कि यदि ईरान ने हमला किया तो उसे गंभीर परिणाम भुगतने होंगे। इजराइल हाई अलर्ट पर है। क्षेत्र में तनाव तथा मिसाइल हमलों की आशंका देखते हुए भारत, फ्रांस, जर्मनी, रूस, पोलैंड, आस्ट्रेलिया ने अपने विमानों को ईरान की वायुसीमा से दूर रहकर उड़ने को कहा है तथा अपनी उड़ानें ड्राइवर्ट की हैं।
हूती विद्रोहियों का खतरा
हूती विद्रोही ईरानी मिसाइलों के दम पर लाल सागर में मजबूत हैं। इन विद्रोहियों को अल कायदा, आईएसआईएस तथा अन्य जेहादी गुटों का समर्थन प्राप्त है। हूती ने अब तक अपने 100 से ज्यादा हमलों में 35 से अधिक देशों के व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाया है। भारतीय व्यापारिक जहाजों को भी उन्होंने नहीं छोड़ा। इनके हमलों की वजह से स्वेज नहर में कमर्शियल जहाजों की आवाजाही में भारी गिरावट आई है। केप ऑफ गुड होप से घूमकर जाने से जहाजों को 15-20 दिन ज्यादा लगते हैं और लागत भी बहुत बढ़ गई है। इससे निर्यात प्रभावित हुआ है।
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