Lok Sabha Election 2024: महाराष्ट्र में बीजेपी, एनसीपी और शिवसेना के बीच सीट शेयरिंग पर अजित पवार गुट के नेता छगन भुजबल का बड़ा बयान सामने आया है. सीट शेयरिंग पर अब अजित गुट की तरफ से सवाल उठाए जा रहे हैं. एनसीपी नेता छगन भुजबल ने महायुति के लोकसभा सीट शेयरिंग पर सवाल उठाते हुए कहा, हमारे और शिवसेना के विधायकों की संख्या लगभग बराबर है. सीट का बंटवारा भी बराबर होना चाहिए. नाशिक में छगन भुजबल ने ये बयान दिया है.
महायुती गठबंधन में सीट शेयरिंग का फॉर्मूला तय!
महाराष्ट्र में NDA के अंदर सीट बंटवारे को लेकर एक लिस्ट सामने आई है जिसमें सूत्रों के हवाले से बताया गया है की एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना 12, अजित पवार गुट की एनसीपी 4 और बीजेपी 32 सीटों पर चुनाव लड़ सकती है. इसी फॉर्मूला पर अब छगन भुजबल ने ऐतराज जताया है.
छगन भुजबल के इस बयान से महाराष्ट्र की राजनीति में खलबली मच गई है. महाराष्ट्र में लोकसभा की सीटों के बंटवारे को लेकर सभी पार्टियों में लगातार युद्ध स्तर पर बैठक चल रही हैं. महाराष्ट्र महायुती यानि बीजेपी, शिंदे शिवसेना और एनसीपी अजित पवार में भी सीटों की शेयरिंग को लेकर बैठक की जा रही हैं.
दो दिन पहले बीजेपी आला कमान अमित शाह भी अजित पवार, एकनाथ शिंदे और देवेंद्र फडणवीस से लोकसभा की सीटों को लेकर मुंबई में मीटिंग कर चुके हैं. अभी तक सीट शेयरिंग का फॉर्मूला सामने नहीं आया है लेकिन अजीत पवार गुट के नेता छगन भुजबल ने नासिक में दिए अपने एक बयान से सबको चौंका दिया है.
उन्होंने कहा है कि एकनाथ शिंदे की शिवसेना के पास जितने विधायक हैं लगभग उतने ही विधायक हमारे पास भी हैं इसलिए लोकसभा सीटों का भी बंटवारा बराबर-बराबर होना चाहिए. जितना उनका हक है उतना हमारा भी.
सीट आवंटन पर अभी फैसला नहीं हुआ है. शिंदे गुट और हमारे पास विधायकों की संख्या बराबर है. बीजेपी और शिवसेना ने मिलकर चुनाव लड़ा था, उस समय मोदी लहर में चुने गए थे. हमारे उम्मीदवार धारा के विपरीत लड़े थे इसलिए सभी का सम्मान करना चाहिए. इसलिए आपसी समझ से जगह का आवंटन किया जाना चाहिए. जो उम्मीदवार निर्वाचित हों उन्हें वह सीट मिलनी चाहिए विभागवार प्रतिनिधित्व होना चाहिए. अजित पवार गुट के नेता छगन भुजबल के इस बयान से महाराष्ट्र की एनडीए यानी महायुति में खलबली मच गई है. सबको यह लग रहा था कि लोकसभा की सीटों को लेकर जो फैसला बीजेपी लेगी, वही सबको मान्य होगा. कोई इस मुद्दे पर अभी खुलकर सामने नहीं आ रहा था लेकिन छगन भुजबल की यह मांग शिवसेना और एनसीपी के बीच दरार की वजह भी बन सकती है. जिसको भरने का काम बीजेपी के हाथ में है.
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