कई लोग रिश्तों और रिश्तों की अहमियत को समझ नहीं पाते. कई रिश्ते ऐसे भी होते हैं जिन्हें समझना या व्यक्त कर पाना मुश्किल होता है. कुछ रिश्ते लोग जान कर भी बिगाड़ लेते हैं. कुछ लोग ऐसे होते हैं जो रिश्तों को बदनाम करते हैं. लेकिन सच्चाई चाहे जो भी हो ये तो सही बात है कि रिश्तों को सहेजने और सँवारने की जरुरत होती है, और बहुत कम लोग ही रिश्तों की कसौटी पर खरे उतर पाते है.
बहुत सारी चीजों के लिए हमें सिर्फ एक बार ही मौका देती है. दूसरे के कठिन वक़्त में हमें अपना फ़र्ज़ निभाने के उस मौके को हाथ से नहीं जाने देना चाहिए. वक़्त की नजाकत समझकर सही समय पर सही कदम उठा लेना चाहिए. कहीं न फिर देर हो जाए…
रिश्ते चाहे कैसे भी हों उन्हें निभाने वालों की ही तारीफ़ होती है. फिर एक बात कर्तव्य की भी तो आती है. दूसरा अपने कर्तव्य को नहीं समझ पाया लेकिन आप ने अपने कर्तव्यों को कितनी गंभीरता से निभाया? आप का किसी के प्रति क्या कर्तव्य था उसे आपने कितनी गंभीरता से निभाया. लेकिन इसके साथ यह भी सच है कि किसी की हद से ज्यादा फिक्र करने पर लोग हमें रद्दी के भाव समझने लगते हैं। RLG प्रोडक्शन के बैनर तले बने इस वीडियो में बी आशीष कहते हैं कि लोगो से रिश्ते निभाकर बस एक ही बात सीखी है, किसी की हद से ज्यादा फिक्र करोगे तो वो इंसान तुम्हे रद्दी के भाव समझने लगेगा |
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