
प्रेस फोटोग्राफर: भास्कर.एस.महाले
नाशिक। महाराष्ट्र राज्य के नासिक जिले में सुभाष लाइब्रेरी की एक पुरानी लाइब्रेरी के रूप में अपनी स्वतंत्र पहचान है,जिसकी स्थापना स्वतंत्रता के पूर्व काल में यानी १९४२ में स्वतंत्रता आंदोलन के माहौल में की गई थी। नेताजी सुभाष चंद्र बोस के नाम पर बनी यह लाइब्रेरी इस मायने में अनूठी है कि इसने स्वतंत्रता-पूर्व युग से लेकर आज की नई पीढ़ी तक सभी के साथ पढ़ने की संस्कृति की नाभि को जोड़ा है। पुराने नासिक क्षेत्र में स्थित इस पुस्तकालय के काम को फिर से सक्रिय करने के पीछे साने गुरुजी की प्रेरणा थी। पढ़ने की प्रेरणा की इस विरासत को इस पुस्तकालय ने आज भी संरक्षित रखा है। यह सुभाष पब्लिक लाइब्रेरी के कार्यशाला का आयोजन महाविद्यालय के प्राचार्य डॉ.ए.वी पाटिल सर ज़ी के मार्गदर्शन में लिया गया। इस अवसर पर सुभाष लाइब्रेरी के अध्यक्ष श्री मारुति तांबे ज़ी ने छात्रों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि डिजिटल क्रांति ने जीवन के सभी क्षेत्रों को कवर कर लिया है। इसलिए पुस्तकालयों को भी इस तकनीक का उपयोग बढ़ाने की आवश्यकता है। विशेषकर नई पीढ़ी के पाठकों के लिए डिजिटल लाइब्रेरी संसाधन एवं सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार के संस्कृति विभाग द्वारा पुस्तकालय को चार स्तरों पर सशक्त बनाने का प्रयास किया जा रहा है। जैसे राष्ट्रीय वर्चुअल लाइब्रेरी बनाना, मॉडल लाइब्रेरी, प्रशिक्षण और मार्गदर्शन और लाइब्रेरी की वर्तमान स्थिति पर एक सर्वेक्षण। उन्होंने यह भी कहा कि पढ़ने की संस्कृति विकसित करने में सार्वजनिक ‘पुस्तकालयों की भूमिका महत्वपूर्ण है।और इस क्षेत्र में काम करने वालों को नए बदलावों के बारे में पता होना चाहिए। उन्होंने विद्यार्थियों के समक्ष सुभाष पुस्तकालय का इतिहास भी प्रस्तुत किया। साथ ही, सुभाष लाइब्रेरी के लाइब्रेरियन श्री दिलीप तांबे ज़ी ने छात्रों को लाइब्रेरी की सभी पुस्तकों के बारे में जानकारी दी। सुरगाना कॉलेज के लाइब्रेरियन प्रो.संजय महाजन ने इस किताबों के प्रति अपना आभार व्यक्त किया।और कार्यशाला की अध्यक्षता कॉलेज के मराठी विभाग के प्रमुख प्रोफेसर सोमनाथ पावड़े ने सर ज़ी द्वारा किया गया। उन्होंने नई शिक्षा नीति की दृष्टि से इस कार्यशाला के महत्व पर बल दिया। बालासाहब धूम ने प्रयास किया. इस कार्य के लिए महाविद्यालय के उप प्राचार्य प्रो. वी.डी. अहिरे सर एवं महाविद्यालय के शैक्षणिक पर्यवेक्षक प्रो. एस.एम.भोये ने शुभकामनाएं दीं. कार्यशाला में कॉलेज के मराठी स्नातकोत्तर विभाग के सभी छात्रों ने भाग लिया।