सूरत. देश में कोविड के अमिक्रॉन वैरिएंट्स के सब वैरिएंट्स जेएन.1 से जुड़े केस सामने आने से स्वास्थ्य विभाग तैयारियों में जुट गया है। नई सिविल अस्पताल के किडनी बिल्डिंग में सी-ब्लॉक में जेएन-1 के संदिग्ध मरीजों के लिए वार्ड बनाने का कार्य शुरू हो गया है। अस्पताल के आरएमओ समेत अधिकारियों की टीम ने दौरा कर 40 बेड तैयार करने के निर्देश दिए हैं। दूसरी तरफ, विशेषज्ञ चिकित्सकों का कहना है कि जेएन-1 से घबराने की जरूरत नहीं है। पॉजिटिव मरीजों में फेफड़े में वायरस मेजर रूप में फैल जाए, ऐसा नहीं दिख रहा। वरिष्ठ नागरिकों और कोमोर्बिड मरीजों को अधिक एहतियात बरतनी चाहिए।
दक्षिण भारत के मामलों से यह वैरिएंट्स ओमिक्रॉन फैमिली से होने का पता लगा है। इसलिए उसी तर्ज पर तेजी से इसके फैलने का खतरा है। हालांकि विशेषज्ञों का कहना है कि अभी शहर में इसके फैलने के आसार बहुत कम हैं। इसके बावजूद शहरवासियों को अलर्ट रहने की जरूरत है। क्योंकि सर्दी में वायरस तेजी से फैलता है और प्रदूषण के साथ संक्रमण हो जाए तो यह ज्यादा खतरनाक हो सकता है।
चेस्ट विशेषज्ञ डॉ. समीर गामी ने राजस्थान पत्रिका को बताया कि जेएन-1 ओमिक्रॉन का ही सब वेरिएंट है। सबसे पहले जर्मनी में डेढ़ माह पहले केस मिला था। इसमें कोरोना के लक्षणों के आलावा डायरिया (उल्टी-दस्त) के लक्षण देखने को मिलते हैं। बताया जा रहा है कि इसके स्पाइक में बदलाव हुआ है। यह वायरस खुद को जिंदा रखने के लिए अपने मूल स्वरूप में बदलाव करता रहता है। जहां पर निगरानी अच्छी होती है, वहां नए वेरिएंट का पता चल जाता है। गंभीर सर्दी-खांसी, बुखार के मरीजों को आरटीपीसीआर टेस्ट करके कोरोना मरीजों की जांच करवानी चाहिए। सरकार की ओर से पहले से एसओपी बनी हुई है। कोविड पॉजिटिव मामलों की जिनोम सिक्वेंसिंग करते रहना है।
