सूरत . गुजरात की आर्थिक राजधानी सूरत में रविवार को जैसे ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विश्व की सबसे बड़ी ऑफिस बिल्डिंग ‘सूरत डायमंड बुर्स’ का उद्घाटन करेंगे, उसी के साथ सूरत के इतिहास के पुनर्जीवित होने की शुरुआत हो जाएगी। 16वीं-17वीं शताब्दी के इतिहास के पन्नों में सूरत वैश्विक व्यापार का बड़ा केन्द्र था, 84 देशों के लोग यहां व्यापार के लिए आते थे। अब सूरत डायमंड बुर्स के शुरू होने से कहानी फिर दोहराई जाएगी। सूरत के डायमंड बुर्स में हीरों और ज्वैलरी की खरीदी के लिए दुनिया के 175 देशों के लोग यहां आएंगे। इसके लिए सूरत के एयरपोर्ट को भी अंतरराष्ट्रीय टर्मिनल का दर्जा दे दिया गया है। प्रधानमंत्री मोदी रविवार को नए टर्मिनल का भी उद्घाटन करेंगे।
विश्व केद 90 फीसदी हीरों की कट-पॉलिशिंग के साथ अब सूरत हीरे और ज्वैलरी का ट्रेडिंग हब भी बनेगा। इसी उद्देश्य के साथ खजोद में 3500 करोड़ की लागत से सूरत डायमंड बुर्स का निर्माण किया गया है। 4500 ऑफिसों वाले विश्व के सबसे बड़े कमर्शियल हब का रविवार सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी विधिवत उद्घाटन करेंगे। इसी के साथ सूरत अब डयमंड ट्रेडिंग का भी बड़ा वैश्विक केंद्र बन जाएगा, जो सूरत की विकास गाथा में एक और अध्याय जोड़ देगा। एक्सचेंज की स्थापना का उद्देश्य भारत से हीरे, रत्न और आभूषणों के आयात, निर्यात और व्यापार को बढ़ावा देना और हीरे के उत्पादन में शामिल छोटे-बड़े उद्यमों, एमएसएमई को आधुनिक बुनियादी ढांचा और वैश्विक मंच प्रदान करना है।
सूरत में 175 देशों के व्यापारियों को पॉलिश किए हुए हीरे खरीदने का मंच मिलेगा।
खास बात यह है कि सूरत डायमंड बुर्स के विश्व स्तरीय प्रोजेक्ट को साकार करने के लिए कोई एक व्यक्ति या कंपनी नहीं, बल्कि 4,200 व्यापारी एक साथ आगे आए।
