मुंबई: सपनों की नगरी कही जाने वाली मुंबई में सब कुछ वैसा नहीं होता है, जैसा हम देखते हैं। भागदौड़ भरी जिंदगी, काम का दबाव और तनाव यहां की दिनचर्या में शुमार है। इससे हर दिन लोग दो चार हो रहे हैं। इसके बावजूद चमचमाती मायानगरी की चकाचौंध से हार जाते हैं, वह मौत को गले लगाने में ही समस्या का समाधान समझ बठते हैं। इसकी तस्दीक राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) द्वारा जारी आंकड़ों से स्पष्ट होता है, जो चौकानें वाले हैं। इस रिपोर्ट के मुताबिक, मुंबई में हर दिन कम से कम चार लोग जिंदगी खत्म कर लेते हैं। ओवरऑल बात करें तो पूरे देश के शहरों में आत्महत्या करने की घटनाओं के मामले में मुंबई का चौथा स्थान है। यहां 2022 में 1,501 खुदकुशी की घटनाएं दर्ज की गई थीं जबकि 2021 में 1436 घटनाएं दर्ज हुईं थीं। हालांकि, 2021 की तुलना में 2022 में 4.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जो चिंता का विषय है।
खुदकुशी के मामलों में दिल्ली सबसे आगे
एनसीआरबी रिपोर्ट के अनुसार, सबसे ज्यादा 3,367 आत्महत्याएं दिल्ली में दर्ज की गई। दूसरे स्थान पर बेंगलुरु, जहां 2313 मामले और चेन्नई में 1581 घटनाएं खुदकुशी के 2022 में दर्ज किए गए। इन तीन शहरों के बाद मुंबई का चौथा स्थान रहा, जहां 1,501 लोगों ने जिंदगी समाप्त कर ली थी। हालांकि, राज्यों की बात करें तो पिछले साल देश भर में महाराष्ट्र में 22746 लोगों ने खुदकुशी किया था। इसके बाद दूसरे स्थान पर तमिलनाडु (19,834), तीसरे पर मध्य प्रदेश (15,386), चौथे पर कर्नाटक (13,606) और पांचवें स्थान पर पश्चिम बंगाल (12,669) रहा है। देश भर में हुए कुल आत्महत्या के मामलों में 49 प्रतिशत लोगों इन्हीं पांच राज्यों में रहने वाले थे, जिससे पता चलता है कि महानगरों की लाइफ स्टाइल किस कदर तनावपूर्ण है।
इसलिए मुंबईकर देते हैं जान
किसी भी परिस्थिति में हालात का सामना करने का माद्दा रखने के बावजूद भी मुंबईकर जिंदगी के आगे घुटने टेकने में देश भर में चौथें स्थान पर हैं। यहां के लोगों द्वारा आत्महत्या करने के कारणों की बात करें तो सबसे अधिक पारिवारिक कलह के कारण लोगों ने खुदकुशी की है। एनसीआरबी रिपोर्ट बताती है कि यहां पारिवारिक कलह के कारण 374 लोगों ने जान गंवा दी हैं। बीमारी (239), नशा (172), बेरोजगारी (100),परीक्षा में असफल (72), प्रेम प्रसंग (50), ऋण (28), गरीबी (23), वैवाहिक जिंदगी से हताश (25), प्रियजन को खोना (12), संपत्ति विवाद (8) और व्यापार में असफलता के कारण 12 लोगों ने जान दी थी। अन्य कारणों से 83 जबकि 282 लोगों ने किस वजह से आत्महत्या किया था, पुलिस को इसका पता नहीं चल पाया।
