मुंबई : देश की आर्थिक राजधानी मुंबई को मायानगरी के नाम से भी जाना जाता है। यह भारत के उन बड़े शहरों में से एक है, जहां ड्रग्स की सबसे ज्यादा सप्लाई की जाती है। यहां 11 महीने तो ड्रग्स के रेट अमूमन एक जैसे रहते हैं, पर दिसंबर महीने में ड्रग्स के भाव अमूमन 10 से 25 प्रतिशत तक बढ़ जाते हैं। एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने एनबीटी को यह जानकारी दी। इस अधिकारी के अनुसार, नए साल की पार्टियों की लोग अक्सर तीन से चार सप्ताह पहले से प्लानिंग करने लगते हैं। ड्रग्स के लती लोग इस दौरान पेडलर्स को बहुत फोन करते हैं। पेडलर्स उसी हिसाब से डिस्ट्रिब्यूटर्स और सप्लायर्स तक डिमांड की जानकारी शेयर करते हैं। उस हिसाब से सब अपने-अपने रेट बढ़ा देते हैं। इस अधिकारी के अनुसार, ड्रग्स माफियाओं के खिलाफ ऑपरेशन चलाने वाली सभी जांच एजेंसियां दिसंबर महीने में सबसे ज्यादा ऐक्टिव रहती हैं। वह रेकॉर्ड वाले उन पेडलर्स की लिस्ट निकालती हैं, जो फिलहाल जमानत पर चल रहे हैं। इस तरीके से पुलिस पेडलर्स के साथ-साथ सप्लायर्स और डिस्ट्रिब्यूटर्स सभी तक पहुंचने की कोशिश करती हैं। केंद्रीय जांच एजेंसियां की मॉनिटरिंग एयरपोर्ट और समुद्र तटों पर सबसे ज्यादा होती है, क्योंकि कोकीन जैसी महंगी ड्रग्स विदेश से ही मुंबई आती है।
पिछले साल से डबल जब्ती
जॉइंट सीपी (कानून व्यवस्था) सत्यनारायण चौधरी ने एनबीटी को बताया कि 26 नवंबर तक मुंबई पुलिस ने ड्रग्स पजेशन के 1210 मामले दर्ज किए थे और 1341 आरोपी गिरफ्तार किए थे। पुलिस ने पिछले 11 महीने में 922 किलो ड्रग्स जब्त की। इसकी कुल कीमत 362 करोड़ रुपये है। चौधरी के अनुसार, ड्रग्स जब्ती का यह आंकड़ा पिछले साल की तुलना में लगभग डबल है। चौधरी ने जो आंकड़े बताए, वह पुलिस स्टेशनों द्वारा की कार्रवाई से जुड़े हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच ने ड्रग्स के खिलाफ अलग से ऐक्शन लिए हैं। मुंबई क्राइम ब्रांच के अंडर में ऐंटि नार्कोटिक्स सेल भी आती है। उसने 96 एफआईआर दर्ज कीं, 199 आरोपियों को गिरफ्तार किया और इनके पास से 48 करोड़ रुपये की ड्रग्स जब्त की। इसके अलावा, बांद्रा क्राइम ब्रांच यूनिट ने सोलापुर में और साकीनाका पुलिस ने नाशिक में ड्रग्स फैक्ट्रियां जब्त कीं।
क्राइम ब्रांच की यूनिट-6 ने पिछले महीने एक बार गर्ल सहित करीब एक दर्जन आरोपी गिरफ्तार किए थे, जो डीसीपी राज तिलक रौशन के अनुसार, पिछले पांच साल से लगभग आधी मुंबई को ड्रग्स सप्लाई करते थे।
सील हो रही हैं प्रॉपर्टीज
एनडीपीएस ऐक्ट में पुलिस को यह अधिकार है कि वह मुकदमे का फैसला आने से पहले ड्रग माफियाओं की प्रॉपर्टीज सील कर सकती है, यदि यह साबित हो जाए कि यह संपत्तियां ड्रग्स की कमाई से खरीदी गई हैं। मुंबई पुलिस ने पिछले 11 महीनों में ऐसी कई संपत्तियां जब्त की हैं। यही नहीं, महाराष्ट्र के डीजीपी की तरफ से यह आदेश भी निकाला गया है कि यदि किसी पुलिस स्टेशन के ज्यूरिडिक्शन में कोई ड्रग्स फैक्ट्री की जानकारी मिलती है और कोई दूसरी एजेंसी वहां कार्रवाई करती है, तो उस इलाके के पुलिस स्टेशन के प्रभारी का ट्रांसफर कर दिया जाएगा और उसके खिलाफ विभागीय जांच शुरू कर दी जाएगी। महाराष्ट्र के कई सीनियर इंस्पेक्टरों पर इन दिनों विभागीय जांच चल रही है।
