
नवसारी। नवसारी के समाजसेवी कनुभाई सुखाड़िया ने गुजरात सरकार के सचिव को पत्र लिखकर पटाखे की बिक्री और फोड़ने पर पूर्ण प्रतिबंध की मांग की हैं। उन्होंने मांग की है कि वह इस बार पटाखे फोड़ने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगाया जाए ताकि प्रदूषण की वजह से शहरवासियों को कोई समस्या न हो।
समाजसेवी कनुभाई सुखाड़िया का कहना है कि हर वर्ष दिवाली के बाद पटाखों की वजह से जो प्रदूषण होता है, उसके कारण सांस लेने संबंधी कई तरह की बीमारियां होती हैं। ऐसे में बेहतर यही रहेगा कि इस बार पटाखें जलाने पर पूर्ण रूप से प्रतिबंध लगा दिया जाए। सुखाड़िया ने कहा कि ऐसे में अगर शहरवासी पटाखा जलाते हैं तो स्थिति और भी भयावह हो सकती है। सुखाड़िया ने कहा कि पटाखें प्रतिबंध करने से बहुत से लोग नाराज हो सकते हैं, लेकिन समय की मांग यही है। क्योंकि जहरीले प्रदूषण से अगर किसी की भी जान जाती है तो उसकी भरपाई करना नामुमकिन होगा।
आपको बता दें कि पटाखे-बम से निकलने वाली सल्फर डाई आक्साइड, नाइट्रस आक्साइड, कार्बन मोनो आक्साइड गैस व हेवी मेटल्स सल्फर, शीशा, क्रोमियम, कोबाल्ट, मरकरी मैग्निशियम मानव सेहत के लिए बहुत घातक हैं। कोरोना का प्रभाव सबसे ज्यादा फेफड़ों पर पड़ा था। इस वजह से संक्रमितों के फेफड़े कमजोर हो चुके हैं। ऐसे में धुआं उनके लिए जहर साबित होगा। ऐसे मरीजों को सांस फूलने की समस्या बढ़ने पर उन्हें अस्पताल तक में भर्ती होना पड़ सकता है। इसी वजह से पिछले साल ही सुप्रीम कोर्ट ने सार्वजनिक स्वास्थ्य और पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता को उजागर करते हुए पटाखों में बेरियम और अन्य प्रतिबंधित रसायनों पर देशव्यापी प्रतिबंध लगाया था। हाल ही में एक स्पष्टीकरण में, भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने इस बात पर प्रकाश डाला कि पटाखों में बेरियम और अन्य प्रतिबंधित रसायनों के उपयोग पर प्रतिबंध लगाने वाला उसका निर्देश, 2021 के आदेश में जारी किया गया, न केवल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र बल्कि पूरे देश पर लागू होता है।
